मुंबई वार्ता संवाददाता

शिवसेना (शिंदे) के उपनेता और प्रवक्ता संजय निरुपम ने उबाठा गुट पर तीखा हमला करते हुए कहा कि हिंदुओं में फूट डालने के उद्देश्य से महापालिका चुनावों में मराठी कार्ड का इस्तेमाल किया गया, लेकिन मुंबई को छोड़कर राज्य की 26 महापालिकाओं में मराठी मतदाताओं ने उबाठा को पूरी तरह नकार दिया।


मुंबई में आयोजित पत्रकार परिषद में निरुपम ने कहा कि मुंबईकरों ने भी उबाठा को विपक्ष की बेंचों पर बैठने का जनादेश दिया है और मुंबई का महापौर महायुति का ही होगा।
● उबाठा का राज्यभर में सूपड़ा साफ
संजय निरुपम के अनुसार, नगर परिषदों, नगर पंचायतों और 29 महानगरपालिकाओं में उबाठा का अस्तित्व लगभग समाप्त हो गया है।मुंबई के बाहर केवल नाशिक, परभणी और चंद्रपुर में उबाठा के कुछ नगरसेवक चुने गए, जबकि अन्य महापालिकाओं में उबाठा खाता तक नहीं खोल सका।इसके विपरीत, शिवसेना का राज्यभर में विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा किशिवसेना के 399 नगरसेवक चुने गएशिवसेना राज्य में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी। निरुपम ने कहा कि इन नतीजों से जनता ने एक बार फिर तय कर दिया है कि असली शिवसेना कौन-सी है।
● कांग्रेस पर भी साधा निशाना
निरुपम ने आरोप लगाया कि मुंबई में कांग्रेस को मिली सफलता मुस्लिम मतों के सहारे है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के चुने गए 24 नगरसेवकों में 14 मुस्लिम समुदाय से हैं, जबकि बाकी 10 भी मुस्लिम वोटों के समर्थन से चुने गए हैं।
● ‘एमआईएम’ का बढ़ता प्रभाव
लोकतंत्र के लिए खतरासंजय निरुपम ने कहा कि मुस्लिम मतों के ध्रुवीकरण के कारण राज्य की महापालिकाओं में एमआईएम के 100 से अधिक नगरसेवक चुने गए हैं, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।


