मुंबई वार्ता संवाददाता

पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा और सतत जल प्रबंधन के लिए मलजल (सीवेज) शोधन बेहद आवश्यक है। बिना शोधन के मलजल से जल प्रदूषण बढ़ता है और जलजनित बीमारियों का गंभीर खतरा पैदा होता है। मलजल शोधन परियोजनाओं के माध्यम से सांडपानी में मौजूद हानिकारक तत्वों और रोगाणुओं को प्रभावी रूप से हटाकर उपचारित जल को पुनः उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाता है। इससे जल स्रोतों पर दबाव कम होता है और नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार आता है। यह बात बृहन्मुंबई महानगरपालिका के आयुक्त एवं प्रशासक भूषण गगराणी ने कही।


घाटकोपर मलजल शोधन केंद्र से भांडुप मलजल शोधन केंद्र और आगे भांडुप संकुल तक तृतीय स्तर पर शोधन किए गए जल के वहन के लिए भूमिगत जल सुरंग (जलबोगदा) के निर्माण कार्य प्रगति पर हैं। इसी पृष्ठभूमि में आयुक्त श्री गगराणी ने भांडुप संकुल स्थित परियोजना स्थल का निरीक्षण किया।


इस अवसर पर उप आयुक्त (विशेष अभियांत्रिकी) पुरुषोत्तम माळवदे, प्रमुख अभियंता (जल आपूर्ति परियोजना) महेंद्र उबाले सहित संबंधित अधिकारी एवं अभियंता उपस्थित थे।पहले टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) की सहायता से भांडुप संकुल से भांडुप मलजल शोधन केंद्र तक 4,365 मीटर लंबी सुरंग के लिए संरेखण सफलतापूर्वक तय किया गया है।
भांडुप संकुल में 175 मीटर गहराई का लॉन्चिंग शाफ्ट बनाया जा रहा है, जिसमें से अब तक 45 मीटर तक खुदाई पूरी हो चुकी है। सुरंग निर्माण के बाद टीबीएम को बाहर निकालने के लिए भांडुप मलजल शोधन केंद्र में 104 मीटर गहराई का रिकवरी शाफ्ट प्रस्तावित है।दूसरी टीबीएम की मदद से भांडुप मलजल शोधन केंद्र से घाटकोपर मलजल शोधन केंद्र तक 7,245 मीटर लंबी सुरंग के लिए संरेखण तय किया गया है। इस मार्ग पर भांडुप मलजल शोधन केंद्र में 155 मीटर गहराई का लॉन्चिंग शाफ्ट बनाया जा रहा है, जिसमें अब तक 7.7 मीटर खुदाई कार्य पूरा हुआ है।पूरी परियोजना के तहत कुल 11,610 मीटर लंबी भूमिगत सुरंग का निर्माण किया जाना है। भांडुप संकुल, भांडुप मलजल शोधन केंद्र और घाटकोपर मलजल शोधन केंद्र के बीच सुरंग निर्माण का कार्य सुनियोजित ढंग से आगे बढ़ रहा है।
निरीक्षण के दौरान आयुक्त गगराणी ने कहा कि मुंबई में जल आपूर्ति बढ़ाने और मांग–आपूर्ति के अंतर को कम करने के लिए भरोसेमंद एवं जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील स्रोत विकसित करना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से महानगरपालिका क्षेत्र में उत्पन्न होने वाले मलजल के आधुनिक शोधन हेतु विभिन्न स्थानों पर मलजल शोधन केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से कुल मलजल का लगभग 50 प्रतिशत तृतीय स्तर तक शोधन करने का प्रस्ताव है।उन्होंने बताया कि 500 मिलियन लीटर प्रतिदिन क्षमता के तृतीय स्तर पर शोधित जल के वहन के लिए धारावी से घाटकोपर और आगे भांडुप संकुल तक 970 मिलियन लीटर प्रतिदिन क्षमता की भूमिगत जल सुरंग प्रस्तावित है। इस सुरंग के निर्माण से संबंधित प्रारंभिक कार्य तेजी से प्रगति पर हैं।
गगराणी ने यह भी कहा कि मलजल शोधन परियोजनाओं के जरिए सांडपानी से ठोस कचरा, हानिकारक रासायनिक तत्व और रोगाणु हटाए जाते हैं, जिससे उपचारित जल सुरक्षित रूप से पुनः उपयोग में लाया जा सकता है। बढ़ती जनसंख्या और तीव्र शहरीकरण को देखते हुए मलजल शोधन परियोजनाएं आधुनिक शहरी बुनियादी ढांचे का एक अनिवार्य हिस्सा हैं।


