मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के सभी अस्पतालों और कार्यालयों में अब नकद भुगतान स्वीकार नहीं किया जाएगा। केस पेपर बनवाने, जांच शुल्क, विभिन्न सेवा शुल्क और बिलों के भुगतान के लिए नागरिकों को अनिवार्य रूप से डिजिटल माध्यमों का ही उपयोग करना होगा।


भारत सरकार की ‘डिजिटल इंडिया’ पहल के तहत बीएमसी ने यह अहम निर्णय लिया है।इस व्यवस्था को लागू करने के लिए महापालिका के वित्त विभाग ने ‘डिजिटल पेमेंट कलेक्शन सेवा प्रणाली’ विकसित करने हेतु निविदा जारी की है। निविदा जमा करने की अंतिम तिथि 24 फरवरी 2026 तय की गई है। निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद बीएमसी के सभी अस्पतालों और कार्यालयों में चरणबद्ध तरीके से डिजिटल भुगतान सुविधा लागू की जाएगी, ऐसा वित्त विभाग के अधिकारियों ने बताया।
गौरतलब है कि महापालिका ने वर्ष 2019 में भी डिजिटल भुगतान योजना लागू करने का प्रयास किया था, लेकिन तकनीकी दिक्कतों और प्रशासनिक कारणों से यह योजना सफल नहीं हो पाई थी। अब इस योजना को नए सिरे से और अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा।नकद लेन-देन से होने वाले विवादों पर लगेगी रोकअब तक नकद भुगतान के कारण छुट्टे पैसों की समस्या, लंबी कतारें, बार-बार काउंटर के चक्कर और कर्मचारियों के साथ विवाद जैसी स्थितियां बनती थीं। साथ ही, नकद लेन-देन में पारदर्शिता को लेकर भी नागरिकों द्वारा सवाल उठाए जाते रहे हैं।
डिजिटल भुगतान से इन सभी समस्याओं पर अंकुश लगने की उम्मीद है।यूपीआई, कार्ड और क्यूआर कोड से होगा भुगताननिविदा के माध्यम से चयनित एजेंसी यूपीआई, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और क्यूआर कोड आधारित भुगतान सुविधाएं उपलब्ध कराएगी। इससे मरीजों और नागरिकों को नकद राशि साथ रखने की आवश्यकता नहीं रहेगी। साथ ही, सभी लेन-देन का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से पारदर्शिता भी बढ़ेगी।


