■ डीएचएफएल को राहत.
मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई की एक विशेष अदालत ने यस बैंक–डीएचएफएल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (डीएचएफएल) के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को बंद कर दिया है।


अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आर.बी. रोटे ने फैसला सुनाते हुए कहा कि कंपनी को दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता की धारा 32A के तहत वैधानिक प्रतिरक्षा प्राप्त है, क्योंकि उसके समाधान योजना को मंजूरी मिल चुकी है।
2 फरवरी को पारित आदेश में अदालत ने स्पष्ट किया कि कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू होने से पहले किए गए अपराधों के लिए, समाधान योजना के अनुमोदन की तारीख से कॉर्पोरेट देनदार की आपराधिक जिम्मेदारी समाप्त हो जाती है और उसके खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।यह मामला यस बैंक के पूर्व एमडी और सीईओ राणा कपूर तथा डीएचएफएल के पूर्व प्रमोटर-डायरेक्टर्स कपिल और धीरज वधावन से जुड़े कथित ‘क्विड प्रो क्वो’ से संबंधित है।
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, अप्रैल से जून 2018 के बीच यस बैंक ने डीएचएफएल के डिबेंचर्स में ₹3,700 करोड़ का निवेश किया। इसके बदले में, डीएचएफएल ने कथित तौर पर राणा कपूर से जुड़ी कंपनी डी lओआईटी अर्बन वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड को केवल ₹39.66 करोड़ मूल्य की निम्न-स्तरीय संपत्तियों के बदले ₹600 करोड़ का भुगतान किया।धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत प्रवर्तन निदेशालय ने दावा किया कि इस मामले में अपराध की आय लगभग ₹5,050 करोड़ है, जिसमें से ₹4,450 करोड़ डीएचएफएल को मिले।
एजेंसी का यह भी आरोप था कि डीएचएफएल का उपयोग उसके प्रमोटर-डायरेक्टर्स ने राणा कपूर के साथ मिलीभगत कर अवैध धन को पार्क करने और निकालने के लिए किया।हालांकि, अदालत ने कहा कि डीएचएफएल के मामले में भारतीय रिज़र्व बैंक की याचिका पर NCLT, मुंबई के समक्ष CIRP पूरी की गई थी। समाधान योजना को IBC की धारा 31 के तहत मंजूरी मिली, जिससे कंपनी के प्रबंधन और नियंत्रण में बदलाव हुआ और नया प्रबंधन ऐसे व्यक्तियों के हाथों में गया जो पूर्व प्रबंधन से संबंधित नहीं थे।
अदालत ने टिप्पणी की कि कॉर्पोरेट देनदार की आपराधिक जिम्मेदारी का समाप्त होना नए प्रबंधन के लिए “अतीत से साफ़ विराम लेकर नई शुरुआत” करने के लिए आवश्यक है।हालांकि, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि पूर्व अधिकारी, निदेशक और अन्य आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा जारी रहेगा, भले ही कंपनी की आपराधिक जिम्मेदारी समाप्त हो गई हो।
गौरतलब है कि NCLT ने 7 जून 2021 को पिरामल कैपिटल एंड हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड द्वारा प्रस्तुत समाधान योजना को मंजूरी दी थी। रिवर्स मर्जर के तहत पिरामल कैपिटल का डीएचएफएल में विलय हुआ और बाद में कंपनी का नाम बदलकर 3 नवंबर 2021 से पिरामल कैपिटल एंड हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड कर दिया गया।
अदालत ने यह भी नोट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने 1 अप्रैल 2025 को समाधान योजना की मंजूरी को बरकरार रखते हुए कपिल और धीरज वधावन सहित अन्य की चुनौतियों को खारिज कर दिया था। इसके अलावा, बॉम्बे हाईकोर्ट ने 16 नवंबर 2021 को डीएचएफएल को धारा 32A के तहत मूल अपराध से भी मुक्त कर दिया था।


