■ आवासीय क्षेत्र में स्थापना को लेकर नियमों के उल्लंघन के लगे आरोप.
मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई के सहार गांव स्थित ओम नगर पाइपलाइन रोड, इम्पोर्ट वेयरहाउस के समक्ष हाल ही में अडानी सीमेंट कंक्रीट प्लांट का उद्घाटन किया गया। नियमों की अनदेखी कर यह संयंत्र मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (एमआईएल) की भूमि पर स्थापित किया गया है।यह निजी रेडी मिक्स कंक्रीट (आरएमसी) प्लांट विभिन्न निर्माण परियोजनाओं को कंक्रीट मिश्रण की आपूर्ति करेगा। हालांकि, इसके संचालन को लेकर स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने गंभीर आपत्ति जताई है।


‘वॉचडॉग फाउंडेशन’ के न्यासियों—निकोलस अल्मेडा और अधिवक्ता गॉडफ्रे पिमेंटा—ने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी), बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) तथा अन्य संबंधित प्राधिकरणों को पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि यह संयंत्र घनी आबादी वाले आवासीय क्षेत्र, जिसमें शांति नगर, आनंद नगर, ओम नगर और भवानी नगर शामिल हैं, के समीप स्थापित किया गया है। यह क्षेत्र सहार एक्वा लाइन-3 मेट्रो स्टेशन तथा एलिवेटेड रोड के निकट स्थित है।


पत्र में कहा गया है कि आरएमसी प्लांट की स्थापना कथित रूप से निर्धारित पर्यावरणीय मानकों और स्थान चयन (साइटिंग) नियमों का उल्लंघन करती है। संगठन का आरोप है कि इस प्रकार का औद्योगिक एवं संभावित रूप से प्रदूषणकारी उपक्रम घनी आबादी वाले आवासीय क्षेत्र में स्थापित करना सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करता है।
संगठन ने यह भी उल्लेख किया है कि वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के बिगड़ते स्तर को लेकर माननीय बंबई उच्च न्यायालय ने पूर्व में संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब किया है। ऐसे में आवासीय क्षेत्रों में नए आरएमसी संयंत्रों की अनुमति दिए जाने पर प्रश्नचिह्न खड़ा होता है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि संयंत्र से उत्पन्न धूल, कणीय प्रदूषण, शोर तथा भारी वाहनों की आवाजाही से बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और अन्य संवेदनशील वर्गों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदत्त जीवन के अधिकार का उल्लंघन बताया है।
‘वॉचडॉग फाउंडेशन’ ने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्रदत्त ‘स्थापना की सहमति’ (सीटीई) और ‘संचालन की सहमति’ (सीटीओ) को तत्काल निरस्त करने तथा बीएमसी द्वारा दी गई विकास एवं अन्य अनुमतियों की समीक्षा करने की मांग की है। साथ ही, कथित नियम उल्लंघन में संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी मांग की गई है।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो वे बंबई उच्च न्यायालय, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) तथा अन्य सक्षम प्राधिकरणों का दरवाजा खटखटाने के लिए बाध्य होंगे।इस मामले में संबंधित प्राधिकरणों की आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है।


