श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

मुंबई में 500 वर्गफुट तक के घरों को संपत्ति कर से छूट देने के बाद अब 700 वर्गफुट तक के घरों को भी सरसकट संपत्ति कर माफी देने का प्रस्ताव मुंबई महापालिका सभागार में पारित कर दिया गया। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने यह प्रस्ताव रखा, जिसे बिना चर्चा के सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी सहित शिवसेना, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और अन्य दलों ने समर्थन देकर मंजूर कर दिया।


अचानक पारित हुए इस करमाफी प्रस्ताव से महापालिका के आर्थिक भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि 700 वर्गफुट तक के घरों को करमाफी देने का निर्णय सभागार में लिया गया है, लेकिन अंतिम फैसला राज्य सरकार के रुख पर निर्भर करेगा।


मुंबई शहर और उपनगरों में कुल 9 लाख 55 हजार 38 संपत्तियां दर्ज हैं। इनमें से 500 वर्गफुट या उससे कम क्षेत्रफल वाले 3 लाख 56 हजार 652 आवासीय घरों को पहले ही पूर्ण संपत्ति कर छूट दी जा चुकी है। इस छूट के कारण महापालिका को हर साल करीब 462 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है।अब यदि 500 से 700 वर्गफुट तक के लगभग 70 से 80 हजार घरों को भी करमाफी दी जाती है, तो महापालिका को अतिरिक्त 650 से 700 करोड़ रुपये तक का वार्षिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
संपत्ति कर में छूट के कारण इन घरों पर जलकर और मलनिस्सारण कर भी माफ हो जाता है, जिससे महापालिका की आय और घटती है। इसी पृष्ठभूमि में महापालिका प्रशासन ने बिना मीटर वाले घरों पर जल शुल्क और मलनिस्सारण शुल्क लगाने का निर्णय लिया है, लेकिन इस प्रस्ताव का भी राजनीतिक दलों द्वारा विरोध किया जा रहा है।ऐसे में बढ़ते व्यय और घटते राजस्व के बीच महापालिका प्रशासन के सामने आय बढ़ाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।


