मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

महाराष्ट्र में राज्यसभा की सात सीटों के लिए 16 मार्च को होने वाले चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। विधायकों की संख्या के आधार पर तीन से चार सीटें जीतने की स्थिति में मौजूद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले के अलावा कुछ चौंकाने वाले नामों की घोषणा होने की संभावना जताई जा रही है। इनमें एक गैर-मराठी नेता का नाम भी चर्चा में बताया जा रहा है।


विपक्षी महाविकास आघाड़ी (एमवीए) में उम्मीदवारों को लेकर चल रहे मतभेदों के बीच सत्ताधारी महायुति पहले चरण में छह सीटों पर जीत को लेकर आश्वस्त मानी जा रही है। वहीं अंतिम समय में सातवीं सीट पर भी उम्मीदवार उतारने की रणनीति पर विचार होने की जानकारी सामने आई है।
राज्यसभा के लिए भाजपा के चार उम्मीदवारों के नाम तय करने को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निवास पर राज्य संचालन समिति की बैठक हाल ही में हुई। तय नामों को लेकर भाजपा अध्यक्ष नितीन नवीन से प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र चव्हाण और अन्य वरिष्ठ नेताओं की चर्चा होने की संभावना है। अगले एक-दो दिनों में उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार, भाजपा सामान्यतः राज्यसभा में एक ही नेता को दोबारा मौका देने से बचती है। हालांकि पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री भागवत कराड को लेकर अपवाद की चर्चा है। वहीं रावसाहेब दानवे और धैर्यशील पाटील को संगठनात्मक काम में लगाने की संभावना जताई जा रही है।इसके अलावा भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावडे और राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर के नाम भी चर्चा में हैं। तावडे महाराष्ट्र से राज्यसभा में आने को लेकर कितने इच्छुक हैं, यह भी सवाल बना हुआ है।
सूत्रों का कहना है कि उम्मीदवारों के नाम उच्च स्तर पर लगभग तय हो चुके हैं, जिनमें एक गैर-मराठी नेता का नाम भी शामिल हो सकता है।महायुति के सूत्रों के मुताबिक सात सीटों में से भाजपा चार, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) एक और शिवसेना एक सीट पर उम्मीदवार उतार सकती है। सातवीं सीट पर भी उम्मीदवार उतारने का संकेत केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की ओर से मिलने की चर्चा है।
सातवीं सीट जीतने के लिए भाजपा को लगभग 20 अतिरिक्त मतों की आवश्यकता होगी, जिसकी तैयारी महायुति द्वारा किए जाने की बात कही जा रही है।वहीं महाविकास आघाड़ी के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण बताई जा रही है। कांग्रेस और उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना साथ आ जाएं तो भी उनके पास केवल 36 मतों का आंकड़ा बनता है, जो जीत के लिए पर्याप्त नहीं माना जा रहा।
राज्यसभा चुनाव की तारीख नजदीक आते ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। सत्ताधारी भाजपा इस चुनाव को प्रतिष्ठा की लड़ाई मानकर पूरी ताकत झोंकती दिख रही है, जिससे मुकाबला और अधिक रोचक होने की संभावना है।


