सुरेश मिश्र /कवि/ मुंबई वार्ता

ज्योति जलाकर ज्योतिर्मय जो
जग का कोना-कोना कर दे
ब्राह्मण ही वह पारस पत्थर,
जो लोहे को सोना कर दे।


तुम्हीं बताओ राम-कृष्ण को
किसने शिक्षा दी थी?
अर्जुन भीम, और बलदाऊ को
गुरुदीक्षा दी थी ?
सत्यव्रती श्री हरिश्चंद्र के गुरु भी तो ब्राह्मण थे,
परशुराम ने कदम-कदम, पर कई परीक्षा दी थी ।
अपने त्याग और तप बल से जो ईश्वर को बौना कर दें
ब्राह्मण ही वह पारस पत्थर,जो लोहे को सोना कर दे।


चरवाहे को पकड़ चक्रवर्ती बनवा दे ब्राह्मण है।
एक दलित को आम्बेडकर साहेब बनवा दे
ब्राह्मण हैजो चाणक्य नीति जग माने
बाबू वह भी ब्राह्मण है शुंग वंश जो शत्रु मिटा दे
पढ़ लो वह भी ब्राह्मण है।
यदि तलवार उठा ले,बाजीराव मुगल को दोना कर दे
ब्राह्मण ही वह पारस पत्थर,जो लोहे को सोना कर दे।
सावरकर का नाम सुने हो जिसने झेला काला पानी
चंद्रशेखर आजाद कौन थे,वह भी थे ब्राह्मण बलिदानी
तिलक,विनोवा भावे, के संग मालवीय की पढ़ो कहानी
तात्या टोपे,मंगल पांडे दिए वतन पर जो कुर्बानी।
भारत माता के हित खातिर खुद को सदा बिछौना कर दे
ब्राह्मण ही वह पारस पत्थर,जो लोहे को सोना कर दे।
तुम सब ही तो कहते थे कि, ब्राह्मण होते सदा भिखारी
फिर तुम सबका शोषण कैसे किया बताओ हे नर-नारी
जो जग का कल्याण चाहता,उसको कहते अत्याचारी
आबादी कम थी इस कारण,लोकतंत्र में पड़े न भारी
शस्त्र शास्त्र दोनों जो सीखे फ्यूचर सुखद सलोना कर दें
ब्राह्मण ही वह पारस पत्थर,जो लोहे को सोना कर दे।


