“गड्ढे जस के तस – 90 करोड़ का फिर खेल?”‘गड्ढामुक्ति’ अभियान पर उठे भ्रष्टाचार के गंभीर सवाल।

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मुंबई वार्ता संवाददाता


मुंबई, सोमवार (27 अप्रैल 2026): मुंबई महानगरपालिका के अतिरिक्त आयुक्त अभिजीत बांगर को ‘गड्ढामुक्ति’ अभियान में कथित अनियमितताओं और संभावित भ्रष्टाचार को लेकर ई-मेल के माध्यम से विस्तृत शिकायत भेजी गई है। यह जानकारी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के प्रदेश प्रवक्ता एवं युवा मुंबई अध्यक्ष एडवोकेट अमोल मातेले ने दी।


उन्होंने आरोप लगाया कि हर साल करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद मुंबई की सड़कों की हालत जस की तस बनी रहती है और बारिश आते ही हजारों गड्ढे फिर से उभर आते हैं।

■ मुख्य आरोप

हर साल भारी खर्च, नतीजा शून्य: पिछले कई वर्षों से सड़कों की मरम्मत पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन कोई ठोस सुधार नहीं दिखता।
इस साल 90 करोड़ का प्रस्ताव: ‘गड्ढामुक्ति’ के नाम पर इस वर्ष करीब 90 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है, लेकिन इसका स्पष्ट हिसाब सार्वजनिक नहीं है।

■ घटिया काम की पुनरावृत्ति

नए बने डामर और कंक्रीट रोड भी कम समय में खराब हो जाते हैं, जिससे गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
एक ही सड़कों पर बार-बार खर्च: कुछ जगहों पर बार-बार काम देकर धन के दुरुपयोग की आशंका जताई गई है।
टेंडर प्रक्रिया पर सवाल: ठेकेदारों के चयन में पारदर्शिता की कमी और संभावित मिलीभगत का आरोप।

■ अमोल मातेले का बयान


“मुंबईकरों की आंखों में धूल झोंककर ‘गड्ढामुक्ति’ के नाम पर करोड़ों रुपये का खेल चल रहा है। हर साल नए वादे किए जाते हैं, लेकिन सड़कें फिर भी गड्ढों से भरी रहती हैं। इस बार भी 90 करोड़ का बजट है, यानी ‘गड्ढे कायम और पैसों का खेल जारी’।”

■ प्रशासन से प्रमुख मांगें

पिछले 5 वर्षों के ‘गड्ढामुक्ति’ खर्च का विस्तृत ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक किया जाए।
इस वर्ष के 90 करोड़ रुपये का कामवार विवरण जारी किया जाए।
सभी कार्यों की थर्ड-पार्टी क्वालिटी जांच अनिवार्य की जाए।
खराब काम करने वाले ठेकेदारों को तुरंत ब्लैकलिस्ट किया जाए।
जिम्मेदार अधिकारियों पर अनुशासनात्मक और आपराधिक कार्रवाई हो।
नागरिकों के लिए ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम शुरू किया जाए।

मामले को गंभीर बताते हुए मातेले ने चेतावनी दी कि यदि इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो कानूनी कार्रवाई, जनआंदोलन और उच्चस्तरीय जांच की मांग की जाएगी।
उन्होंने कहा कि मुंबई का ‘गड्ढामुक्ति’ अभियान अब केवल घोषणा नहीं, बल्कि कथित भ्रष्टाचार का उदाहरण बनता जा रहा है। “जैसी करनी वैसी भरनी” के अनुसार दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

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