श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) को दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के पंजीकरण शुल्क की वसूली बंद रहने के कारण पिछले नौ वर्षों में लगभग 500 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। इस मामले पर बीएमसी की विधि समिति ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासन से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।


विधि समिति की समीक्षा में सामने आया कि वर्ष 2016 से दुकानों एवं प्रतिष्ठानों के पंजीकरण शुल्क की वसूली प्रभावी रूप से बंद है। इसके चलते महानगरपालिका को मिलने वाला बड़ा राजस्व स्रोत प्रभावित हुआ और करोड़ों रुपये की संभावित आय नहीं मिल सकी।


समिति ने कहा कि संबंधित विभागों के बीच समन्वय की कमी और कानूनी प्रक्रियाओं में देरी के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। समिति के सदस्यों ने प्रशासन से लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा कर शुल्क वसूली की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने का आग्रह किया।
विधि समिति का मानना है कि यदि समय रहते आवश्यक निर्णय लिए गए होते तो महानगरपालिका को इतना बड़ा आर्थिक नुकसान नहीं उठाना पड़ता। समिति ने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में राजस्व से जुड़े मामलों की नियमित निगरानी की जाए ताकि ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
बीएमसी प्रशासन से इस मुद्दे पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। साथ ही, दुकानों और प्रतिष्ठानों के पंजीकरण शुल्क की वसूली पुनः शुरू करने के लिए आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक उपायों को तेज करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
समिति के अनुसार, मुंबई जैसे महानगर में 500 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान नगर सेवाओं, बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है, इसलिए इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाना आवश्यक है।


