श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) मुंबई ने देश के लोकतांत्रिक इतिहास के सबसे विवादित अध्याय माने जाने वाले आपातकाल की वर्षगांठ पर गुरुवार को मुंबई के सभी छह जिलों में पदयात्रा और साइकिल रैली का आयोजन किया। भाजपा मुंबई अध्यक्ष एवं विधायक अमित साटम के मार्गदर्शन तथा भाजयुमो मुंबई अध्यक्ष दीपक सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस अभियान में हजारों युवा कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प लिया।


कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं और नागरिकों को 25 जून 1975 को लागू किए गए आपातकाल की याद दिलाई गई। वक्ताओं ने कहा कि उस दौर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाए गए, विपक्षी नेताओं और लोकतंत्र सेनानियों को जेल में डाला गया तथा मीडिया की स्वतंत्रता पर भी अंकुश लगाया गया था।


इस अवसर पर सभी जिलों में उपस्थित कार्यकर्ताओं ने लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की विशेष शपथ ली। शपथ में यह संकल्प दोहराया गया कि देश में दोबारा कभी भी लोकतंत्र और संविधान विरोधी परिस्थितियां उत्पन्न नहीं होने दी जाएंगी तथा राष्ट्रीय मूल्यों की रक्षा के लिए सदैव सजग रहेंगे।
भाजयुमो मुंबई अध्यक्ष दीपक सिंह ने कहा कि 25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक काला दिन था, जब सत्ता को संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं से ऊपर रखने का प्रयास किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता बचाने के लिए पूरे देश को आपातकाल की बेड़ियों में जकड़ दिया गया, लाखों लोगों को जेल भेजा गया और नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन किया गया।
उन्होंने आगे कहा कि आज लोकतंत्र और संविधान की चिंता जताने वाले लोगों को इतिहास नहीं भूलना चाहिए। देश की युवा पीढ़ी को आपातकाल के वास्तविक इतिहास की जानकारी होना आवश्यक है, ताकि भविष्य में कोई भी सरकार नागरिक अधिकारों पर अंकुश लगाने का साहस न कर सके।
भाजयुमो ने इस अभियान को केवल विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि लोकतंत्र के प्रति जनजागरूकता का राष्ट्रीय अभियान बताया। मुंबई के सभी छह जिलों में आयोजित पदयात्रा और साइकिल रैली के माध्यम से युवाओं ने संदेश दिया कि देश का युवा संविधान, लोकतंत्र और राष्ट्रहित की रक्षा के लिए हमेशा तैयार है।
कार्यक्रम के समापन पर सभी कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने लोकतंत्र, संविधान और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प लिया। आयोजन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि भारत की लोकतांत्रिक चेतना को कभी दबाया नहीं जा सकता और आपातकाल जैसे अध्याय को देश कभी नहीं भूलेगा।


