मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की पारंपरिक लोककलाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए लोककला अनुदान योजना का दायरा बढ़ाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब ‘नमन खेळे’, ‘जाखडी’, ‘वहीगायन’ और ‘झाड़ीपट्टी’ जैसी चार पारंपरिक लोककलाओं को भी सरकारी अनुदान योजना में शामिल किया जाएगा। इसकी घोषणा राज्य के सांस्कृतिक कार्य मंत्री एडवोकेट आशीष शेलार ने विधानसभा में की।


मंत्री शेलार ने कहा कि महाराष्ट्र की लोककलाएं केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि सामाजिक जागरूकता, सांस्कृतिक परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत को संजोने का प्रभावी माध्यम भी हैं। इन लोककलाओं के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए राज्य सरकार समय-समय पर लोककला महोत्सव आयोजित करती है और लोककला मंडलियों को पूंजीगत एवं प्रस्तुति आधारित अनुदान भी प्रदान करती है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2008 से सरकार तमाशा, दशावतार, शाहिरी, खड़ीगंमत और संगीतबारी जैसी लोककलाओं को अनुदान देती आ रही है। अब इस योजना का विस्तार करते हुए नमन खेळे, जाखडी, वहीगायन और झाड़ीपट्टी को भी इसमें शामिल किया गया है।
सरकार के अनुसार, झाड़ीपट्टी रंगमंच पूर्वी विदर्भ के चंद्रपुर, गड़चिरोली, गोंदिया और भंडारा जिलों में लगभग 130 वर्षों से चली आ रही विशिष्ट लोकनाट्य परंपरा है। वहीं वहीगायन धुले, जलगांव और नंदुरबार जिलों की लोकप्रिय लोककला है, जबकि नमन खेळे और जाखडी कोंकण क्षेत्र के सिंधुदुर्ग, रत्नागिरी और रायगढ़ जिलों की सांस्कृतिक पहचान मानी जाती हैं।
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक लोककला श्रेणी के 20 कला दलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी। इस प्रकार प्रत्येक लोककला के लिए 10 लाख रुपये का वार्षिक अनुदान निर्धारित किया गया है।
योजना के अनुसार:
झाड़ीपट्टी – 20 कला दल, कुल 10 लाख रुपये।
वहीगायन – 20 कला दल, कुल 10 लाख रुपये।
नमन खेळे – 20 कला दल, कुल 10 लाख रुपये।
जाखडी – 20 कला दल, कुल 10 लाख रुपये।
सरकार का मानना है कि इस निर्णय से इन पारंपरिक लोककलाओं को नई पहचान मिलेगी, कलाकारों को आर्थिक संबल प्राप्त होगा और महाराष्ट्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।


