बीएमसी को अवैध होर्डिंग्स से करोड़ों के राजस्व नुकसान का आरोप, अधिकारियों-विज्ञापन कंपनियों की मिलीभगत की जांच की मांग।

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मुंबई वार्ता संवाददाता

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की स्थायी समिति की बैठक में नगरसेवक एवं समिति सदस्य तेजिंदर सिंह तिवाना ने शहर में लगे अवैध विज्ञापन होर्डिंग्स का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाते हुए दावा किया कि इनके कारण महानगरपालिका को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में अधिकारियों की कथित मिलीभगत से विज्ञापन कंपनियों को अदालत से स्थगन (स्टे) आदेश लेने का अवसर मिल जाता है।


तिवाना ने बैठक में बताया कि बांद्रा (पश्चिम) के एस.वी. रोड स्थित भागीरथी सदन में सुपर सिंडिकेट एडवरटाइजिंग कंपनी ने भूमि मालिक की वैध अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) के बिना विज्ञापन होर्डिंग लगाया है, जो पूरी तरह अवैध है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की राहत या समय-सीमा देना उचित नहीं है।


उन्होंने आरोप लगाया कि महानगरपालिका द्वारा संबंधित कंपनी को होर्डिंग हटाने के लिए एक महीने का समय दिए जाने से उसे अदालत का दरवाजा खटखटाने और स्टे ऑर्डर हासिल करने का मौका मिल जाता है। इससे अवैध होर्डिंग लंबे समय तक लगे रहते हैं, विज्ञापन कंपनियां आर्थिक लाभ कमाती रहती हैं और बीएमसी को भारी राजस्व हानि उठानी पड़ती है।


तिवाना ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मामलों में संबंधित अधिकारी अप्रत्यक्ष रूप से विज्ञापन कंपनियों को अदालत से स्थगन आदेश दिलाने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि इसमें किसी अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।


उन्होंने मांग की कि अवैध होर्डिंग्स के जरिए अर्जित आय का पूरा हिसाब लगाया जाए, संबंधित कंपनियों पर आर्थिक दंड लगाया जाए और महानगरपालिका को हुए राजस्व नुकसान की वसूली की जाए।
तिवाना ने यह भी कहा कि वर्षों से शिकायतें मिलने के बावजूद कार्रवाई नहीं करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए।


उन्होंने प्रशासन से शहरभर के सभी अवैध होर्डिंग्स के खिलाफ तत्काल अभियान चलाने, महानगरपालिका के राजस्व की रक्षा करने और भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाने की मांग की।


हालांकि, यह आरोप तेजिंदर सिंह तिवाना द्वारा स्थायी समिति की बैठक में लगाए गए हैं। इन आरोपों पर महानगरपालिका प्रशासन या संबंधित विज्ञापन कंपनी की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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