मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद वर्षा गायकवाड़ ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के विधानसभा में दिए गए बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि सरकार से सवाल पूछने वालों को धमकाना लोकतंत्र नहीं बल्कि हुकूमशाही की निशानी है। उन्होंने कहा कि सरकार से जवाब मांगना महाराष्ट्र की बदनामी नहीं, बल्कि जनता का लोकतांत्रिक अधिकार है।


वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के 7,000 करोड़ रुपये की लागत वाले मिसिंग लिंक परियोजना में निर्माण के महज दो महीने के भीतर गड्ढे पड़ गए, झरने जैसी स्थिति बन गई और यातायात रोकना पड़ा। उनके अनुसार यह निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों पर सवाल उठाने वालों को मुख्यमंत्री द्वारा “भाड़े के तट्टू” कहना बेहद आपत्तिजनक है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी परियोजना की गुणवत्ता, जनता की सुरक्षा, दुर्घटनाओं और हजारों करोड़ रुपये के सार्वजनिक धन के उपयोग पर सवाल पूछे जाते हैं, तो इसे महाराष्ट्र की बदनामी नहीं कहा जा सकता। गायकवाड़ के मुताबिक, जनता के पैसे से बनी परियोजनाओं में कुछ ही महीनों में खामियां सामने आना ही राज्य की छवि को नुकसान पहुंचाता है।
मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि परियोजनाओं पर खर्च किया गया पैसा जनता का है, किसी राजनीतिक दल या नेता की निजी संपत्ति नहीं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार का काम गुणवत्तापूर्ण है तो उसे तथ्यों के आधार पर जवाब देना चाहिए, न कि सवाल उठाने वालों को बदनाम करना चाहिए।
वर्षा गायकवाड़ ने आगे आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं की छवि खराब करने के लिए मीडिया और सोशल मीडिया पर करोड़ों रुपये खर्च किए। उन्होंने कहा कि भाजपा को पहले यह देखना चाहिए कि उसने स्वयं ऐसे कितने “भाड़े के तट्टू” खड़े किए हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा आज वही काट रही है, जो उसने वर्षों पहले बोया था।
हालांकि, यह सभी आरोप और टिप्पणियां सांसद वर्षा गायकवाड़ द्वारा जारी बयान में कही गई हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस या राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


