मुंबई वार्ता संवाददाता

पुणे के मोशी में हाल ही में हुई दुर्घटना के मद्देनज़र बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने अपने ठोस कचरा प्रबंधन प्रोजेक्ट्स और डंपिंग ग्राउंड की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की है। बीएमसी के अतिरिक्त नगर आयुक्त (पश्चिम उपनगर) डॉ. विपिन शर्मा ने निर्देश दिए कि सभी कचरा प्रबंधन परियोजनाओं और डंपिंग ग्राउंड पर सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए तथा आगामी मानसून और प्रतिकूल मौसम को देखते हुए सभी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूरी की जाएं।


मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित समीक्षा बैठक में डॉ. शर्मा ने कहा कि प्रत्येक परियोजना के लिए मानसून पूर्व तैयारी के अनुरूप अलग-अलग स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार किए जाएं और सुरक्षा संबंधी सभी नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में उप आयुक्त (ठोस कचरा प्रबंधन) किरण दिघावकर, मुख्य अभियंता अविनाश काटे, संबंधित अधिकारी, परियोजना सलाहकार और विभिन्न ठोस कचरा प्रबंधन परियोजनाओं के ठेकेदार मौजूद रहे।
डॉ. शर्मा ने निर्देश दिए कि डंपिंग ग्राउंड पर कचरे की ऊंचाई निर्धारित सीमा के भीतर रखी जाए तथा परिसर में केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही प्रवेश दिया जाए। आने-जाने वाले सभी लोगों का रिकॉर्ड रखा जाए और शेड, कार्यशालाओं तथा रखरखाव कंटेनरों सहित सभी संरचनाओं का स्टेबिलिटी ऑडिट तत्काल पूरा किया जाए।
उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान वर्षा जल निकासी और सतही जल निकासी प्रणाली का व्यापक निरीक्षण किया जाए। कांजुरमार्ग, देवनार और मुलुंड स्थित बायोमाइनिंग परियोजनाओं में खुदाई के तरीकों की समीक्षा कर सुरक्षित कार्यप्रणाली सुनिश्चित की जाए। अस्थिर खुदाई वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां उचित बैरिकेडिंग की जाए।
डॉ. शर्मा ने देवनार स्थित वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजना और वर्षों से जमा लीगेसी वेस्ट में आग तथा मीथेन गैस से जुड़े संभावित खतरों की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल (RDF) के भंडारण के कारण आग लगने की आशंका को रोकने के लिए विशेष सावधानी बरती जाए और सभी कर्मचारियों व श्रमिकों के लिए नियमित मॉक ड्रिल आयोजित की जाए।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि रिफ्यूज ट्रांसफर स्टेशन (RTS) परिसर में किसी भी प्रकार का अतिरिक्त सामग्री भंडारण न किया जाए। मुख्य अभियंता और उप मुख्य अभियंता को एक सप्ताह के भीतर सभी परियोजना स्थलों का दौरा कर सुरक्षा उपायों और कार्यप्रणाली की समीक्षा करने के निर्देश भी दिए गए।
डॉ. शर्मा ने कहा कि डंपिंग ग्राउंड धंसने, आग लगने, मशीनरी दुर्घटनाओं और खुदाई से जुड़े हादसों को रोकने के लिए संभावित जोखिमों की पहले से पहचान कर उनकी लगातार निगरानी करना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभावी इंजीनियरिंग उपायों और समयबद्ध सुरक्षा प्रबंधन के जरिए दुर्घटनाओं की रोकथाम करना संबंधित विभागों और ठेकेदारों की सामूहिक जिम्मेदारी है।


