श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की 16 जुलाई को हुई महासभा में धारावी पुनर्विकास परियोजना के लिए बेस्ट के धारावी और कालाकिल्ला स्थित दो प्रमुख बस डिपो की कुल 11.58 एकड़ भूमि अदाणी समूह को सौंपने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इस प्रस्ताव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और भारी हंगामा देखने को मिला।


कांग्रेस ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए आरोप लगाया कि बीएमसी अपनी बहुमूल्य जमीन निजी कंपनियों को सौंप रही है। कांग्रेस के गुटनेता अशरफ आजमी ने कहा कि पिछले महीने बीएमसी ने अदाणी समूह की साझेदार कंपनी नवभारत मेगा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को बेस्ट की 11.57 एकड़ जमीन बिना बाजार मूल्य तय किए हस्तांतरित कर दी। उन्होंने यह भी कहा कि पहले लीज पर दी गई संपत्तियों का 400 से 500 करोड़ रुपये का बकाया अभी तक बीएमसी को नहीं मिला है।


आजमी ने सवाल उठाया कि जब अगले वर्ष बीएमसी पर 28,000 करोड़ रुपये की देनदारियां हैं, तब डिपो की जमीन का बाजार मूल्य सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया और किसी स्वतंत्र एजेंसी से उसका मूल्यांकन क्यों नहीं कराया गया।
वहीं, बेस्ट समिति की अध्यक्ष तृष्णा विश्वासराव ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि धारावी पुनर्विकास परियोजना की सफलता और बेस्ट की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए यह कदम आवश्यक है। उन्होंने स्वीकार किया कि पहले पुनर्विकास के लिए दिए गए पांच डिपो से ब्याज सहित करीब 300 करोड़ रुपये अभी भी बेस्ट को मिलने बाकी हैं, लेकिन इस बार सभी आवश्यक कानूनी सुरक्षा उपायों को शामिल किया गया है।
विश्वासराव ने यह भी बताया कि वर्सोवा स्थित सात बंगला बस डिपो के पुनर्विकास का अनुभव अच्छा नहीं रहा। वहां शॉपिंग मॉल बनने के बावजूद डिपो की स्थिति खराब हो गई और रात के समय अवांछित गतिविधियां भी होने लगीं। इसी अनुभव को देखते हुए बेस्ट ने अपने शेष 22 बस डिपो को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर विकसित नहीं करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि बेस्ट की आय बढ़ाने के लिए अन्य विकल्प मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किए गए हैं।


