श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास स्थित विले पार्ले, सांताक्रूज, कुर्ला और घाटकोपर के फनल (विमान उड़ान एवं लैंडिंग मार्ग) क्षेत्र में रहने वाले हजारों लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। इन इलाकों की पुरानी इमारतों के पुनर्विकास का रास्ता आखिरकार साफ हो गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन इमारतों के पुनर्विकास को अन्य विकास योजनाओं से जोड़ने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस संबंध में राज्य सरकार जल्द ही शासनादेश (जीआर) जारी करेगी।


यह मुद्दा पहली बार नवंबर 2016 में उठाया गया था, लेकिन पिछले लगभग 10 वर्षों से इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया था। एयरपोर्ट फनल क्षेत्र में इमारतों की ऊंचाई पर सख्त प्रतिबंध होने के कारण यहां पुनर्विकास पूरी तरह ठप पड़ा था।
इससे पहले सरकार और महानगरपालिका की ओर से कई विकल्पों पर विचार किया गया। मौजूदा एफएसआई के बराबर निर्माण की अनुमति देकर अतिरिक्त टीडीआर (ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स) देने का प्रस्ताव भी रखा गया, लेकिन वह आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं माना गया। पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विधानसभा में 10 मंजिल तक निर्माण के बराबर टीडीआर देने की घोषणा भी की थी, लेकिन वह भी व्यावहारिक समाधान साबित नहीं हुआ।
बाद में यह मांग उठी कि इन इमारतों के पुनर्विकास को विकास नियंत्रण नियमावली (डीसीआर) की धारा 33(7) और 33(9) के तहत अन्य पुनर्विकास योजनाओं से जोड़ा जाए। इसके तहत इमारत का पुनर्निर्माण उसी स्थान पर किया जाएगा, जबकि उससे उत्पन्न अतिरिक्त एफएसआई या टीडीआर का उपयोग अन्य परियोजनाओं में किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
गृह निर्माण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव असीम गुप्ता ने पुष्टि की है कि मुख्यमंत्री की स्वीकृति मिल चुकी है और इस संबंध में जल्द ही अधिसूचना जारी की जाएगी। विधायक विद्या ठाकुर ने भी फनल क्षेत्र के निवासियों के साथ अधिकारियों से मुलाकात कर इस निर्णय की जानकारी दी।
गौरतलब है कि सांताक्रूज पूर्व-पश्चिम, विले पार्ले पूर्व-पश्चिम, कुर्ला और घाटकोपर के कई हिस्से सांताक्रूज और पवन हंस हवाई अड्डों के फनल जोन में आते हैं। अंतरराष्ट्रीय विमानन नियमों के कारण इन क्षेत्रों में इमारतों की ऊंचाई दो से तीन मंजिल तक सीमित है। इसी वजह से सामान्य एफएसआई में पुनर्विकास संभव नहीं हो पा रहा था। कई इमारतें जर्जर और खतरनाक स्थिति में पहुंच चुकी हैं, जबकि अधिकांश निवासी अपने खर्च पर पुनर्निर्माण कराने में सक्षम नहीं हैं।
■ क्या होता है टीडीआर?
ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (TDR) वह व्यवस्था है, जिसमें किसी भूखंड पर उपलब्ध निर्माण क्षमता (एफएसआई) का पूरा उपयोग संभव न होने पर उसके शेष विकास अधिकार को किसी अन्य स्थान पर इस्तेमाल या हस्तांतरित करने की अनुमति दी जाती है। इसी व्यवस्था के जरिए फनल क्षेत्र के पुनर्विकास को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने की योजना तैयार की गई है।


