श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के ने उबाठा नेता और राज्यसभा सांसद संजय राऊत पर तीखा हमला बोला है। म्हस्के ने राऊत को ‘फेकूचंद’ बताते हुए उनके आरोपों पर सवाल उठाए और उन्हें खुली चुनौती दी कि यदि उन्होंने कभी एकनाथ शिंदे के खिलाफ कोई शिकायत पत्र लिखा है तो उसे सार्वजनिक करें।


म्हस्के ने कहा कि यदि राऊत ऐसा एक भी पत्र दिखा देते हैं, तो वह राजनीति छोड़ने के लिए तैयार हैं।म्हस्के ने दावा किया कि जब संजय राऊत को राज्यसभा का टिकट मिलने में देरी हो रही थी, तब उन्होंने उद्धव ठाकरे और रश्मी ठाकरे के खिलाफ भी कथित तौर पर अपशब्दों का इस्तेमाल किया था। उन्होंने कहा कि इस बारे में पूरी शिवसेना को जानकारी है। म्हस्के के अनुसार, राज्यसभा टिकट और नाम की घोषणा में देरी से नाराज राऊत ने ठाकरे परिवार के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था।‘


■ उद्धव को मुख्यमंत्री बनाने के बाद भी उनके भाई को मंत्री नहीं बनाया’
नरेश म्हस्के ने आगे दावा किया कि उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद भी उनके भाई को मंत्री पद नहीं दिया गया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब उद्धव ठाकरे मंत्रालय नहीं जाते थे, तब शिवसेना के विधायकों की बैठक पवई के एक होटल में किसने बुलाई थी, यह सभी जानते हैं।
म्हस्के ने आरोप लगाया कि उस समय विधायकों से उद्धव ठाकरे का विरोध करने और मुख्यमंत्री पद के लिए किसी अन्य नाम को आगे बढ़ाने के लिए कौन कह रहा था, इसकी जानकारी भी शिवसेना को थी। उन्होंने कहा कि संजय राऊत को दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने पुराने बयानों और उस समय की अपनी भूमिका का जवाब देना चाहिए।‘
■ मैं शुरुआत से एकनाथ शिंदे के साथ हूं’
म्हस्के ने कहा कि वह एकनाथ शिंदे के साथ सबसे पहले खड़े होने वाले जिला प्रमुखों में शामिल थे और शिंदे के नेतृत्व पर उनका भरोसा आज भी कायम है। उन्होंने कहा कि वह भविष्य में भी एकनाथ शिंदे के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे।म्हस्के ने दावा किया कि जिस दिन एकनाथ शिंदे ने पार्टी से अलग होने का कदम उठाया, उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने उन्हें फोन किया था। उन्होंने कहा कि उन्होंने उद्धव ठाकरे से स्पष्ट कर दिया था कि वह एकनाथ शिंदे के साथ हैं और उनसे मिलने नहीं आएंगे।
म्हस्के के मुताबिक, उन्हें वर्षा बंगले पर भी बुलाया गया था। उस समय उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि एकनाथ शिंदे को बुलाकर उनके साथ हो रही गलतफहमियों को दूर किया जाना चाहिए और उनके साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।‘
■ अयोध्या दौरे के समय विधान परिषद टिकट का वादा किया था’
नरेश म्हस्के ने संजय राऊत पर एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अयोध्या दौरे के दौरान राऊत ने उनसे कहा था कि विधान परिषद के लिए उनका नाम तय है। लेकिन बाद में अमश्या पडवी को विधान परिषद का टिकट दिया गया।म्हस्के ने राऊत को चुनौती देते हुए कहा कि वह शपथ लेकर बताएं कि क्या उन्होंने खुद यह नहीं कहा था कि उद्धव ठाकरे ने कहा है कि यदि नरेश म्हस्के को विधान परिषद का टिकट दिया गया, तो वह एकनाथ शिंदे के साथ चले जाएंगे।
■ ‘शिंदे के खिलाफ एक शिकायत पत्र दिखा दें, राजनीति छोड़ दूंगा’
नरेश म्हस्के ने संजय राऊत को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि यदि उन्होंने एकनाथ शिंदे के खिलाफ कभी कोई शिकायत पत्र लिखा है तो उसे सार्वजनिक करें। उन्होंने कहा कि राऊत अगर ऐसा एक भी शिकायत पत्र दिखा देते हैं तो वह राजनीति से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं।साथ ही म्हस्के ने राऊत से कहा कि यदि वह ऐसा कोई पत्र पेश नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें खुद राजनीति से इस्तीफा दे देना चाहिए।
म्हस्के के इन आरोपों और चुनौती के बाद महाराष्ट्र की सियासत में शिवसेना और उबाठा के बीच जुबानी जंग और तेज होने के संकेत हैं।


