मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबादेवी इलाके में प्रस्तावित रोबोटिक पार्किंग परियोजना को लेकर विवाद के बीच बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने करीब 58 करोड़ रुपये का नया टेंडर जारी किया है। खास बात यह है कि जिस रोबोटिक पार्किंग परियोजना से यह काम जुड़ा हुआ है, उस पर पहले से रोक लगी हुई है। इस घटनाक्रम ने BMC की कार्यप्रणाली, प्रक्रिया की पारदर्शिता और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।


मुंबादेवी में BMC ने बहुमंजिला रोबोटिक पार्किंग सुविधा विकसित करने की योजना बनाई थी। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 122 करोड़ रुपये थी और इसमें लगभग 546 वाहनों की पार्किंग क्षमता प्रस्तावित थी। परियोजना के तहत 17 मंजिला रोबोटिक पार्किंग टावर का निर्माण शुरू भी हुआ था, लेकिन बाद में काम रोक दिया गया।


BMC के आधिकारिक दस्तावेजों में भी मुंबादेवी के पास 546 क्षमता वाली मल्टीलेवल रोबोटिक कार पार्किंग परियोजना का उल्लेख किया गया था।
■ रोक के बावजूद नया टेंडर क्यों?
ताजा विवाद की मुख्य वजह यही है कि रोबोटिक पार्किंग परियोजना पर रोक की स्थिति बनी हुई है, जबकि उससे संबंधित काम के लिए BMC ने 58 करोड़ रुपये का टेंडर जारी कर दिया। इससे यह सवाल उठ रहा है कि जब मूल परियोजना का भविष्य ही स्पष्ट नहीं है, तो उससे जुड़े काम पर इतनी बड़ी राशि खर्च करने की प्रक्रिया क्यों आगे बढ़ाई जा रही है।
इस मामले में प्रक्रियात्मक पारदर्शिता और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि किसी ऐसी परियोजना से जुड़े नए काम को आगे बढ़ाने से पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि मूल परियोजना पर लगी रोक की स्थिति क्या है और आगे निर्माण की अनुमति मिलेगी या नहीं।
■ ठेकेदार ने मांगा है 55 करोड़ रुपये का मुआवजा
मुंबादेवी रोबोटिक पार्किंग परियोजना लंबे समय से रुकी हुई है। परियोजना के ठेकेदार M/s SMS Limited ने काम रोके जाने को लेकर BMC को करीब 55 करोड़ रुपये के नुकसान की मांग वाला कानूनी नोटिस भी भेजा है। ठेकेदार का तर्क है कि काम को अनुचित तरीके से रोकने के कारण उसे आर्थिक नुकसान हुआ है।
BMC की ओर से पहले यह रुख सामने आया था कि मुंबादेवी की विवादित रोबोटिक पार्किंग परियोजना का काम दोबारा शुरू नहीं किया जाएगा। परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर आपत्तियां भी सामने आई थीं।
■ सार्वजनिक धन के इस्तेमाल पर उठे सवाल
अब 58 करोड़ रुपये के टेंडर ने इस पूरे मामले को फिर चर्चा में ला दिया है। एक तरफ मूल रोबोटिक पार्किंग परियोजना पर रोक और उससे जुड़े कानूनी विवाद हैं, वहीं दूसरी ओर BMC द्वारा संबंधित काम के लिए नया टेंडर जारी किया जाना सवाल पैदा कर रहा है।
मुंबई जैसे अत्यधिक भीड़भाड़ वाले इलाके में पार्किंग की समस्या दूर करने के लिए बहुमंजिला पार्किंग सुविधाओं की जरूरत से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन करोड़ों रुपये की परियोजनाओं में कानूनी स्थिति, प्रशासनिक मंजूरी और खर्च की उपयोगिता स्पष्ट होना जरूरी है।


