श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

महिंद्रा एंड महिंद्रा कर्मचारी संगठन पर महाराष्ट्र राज्य राष्ट्रीय कामगार संघ के अध्यक्ष सचिन अहिर का करीब तीन दशक से चला आ रहा वर्चस्व आखिरकार समाप्त हो गया। लगभग 30 साल बाद हुए संगठन के चुनाव में भाजपा समर्थित श्रमिक उत्कर्ष सभा ने 129 में से 110 सीटों पर जीत दर्ज कर निर्विवाद बढ़त हासिल की। वहीं, सचिन अहिर समर्थित गुट को महज 9 सीटों पर संतोष करना पड़ा।


मुंबई के श्रमिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले इस संगठन में पिछले तीन दशकों से चुनाव नहीं हुए थे। ऐसे में इस चुनाव पर श्रमिक संगठनों के साथ-साथ राजनीतिक क्षेत्र की भी नजर थी। चुनाव में भाजपा विधायक प्रसाद लाड ने अहिर विरोधी श्रमिक गुट को समर्थन दिया, जिससे चुनाव को राजनीतिक रंग भी मिला।


■ प्रसाद लाड के समर्थन से अहिर गुट को चुनौती
भाजपा समर्थित गुट ने चुनाव के लिए व्यापक तैयारी की थी। विधायक प्रसाद लाड के समर्थन से सुहास गोरे के नेतृत्व वाले गुट ने प्रचार अभियान चलाया। कंपनी के जीप विभाग के करीब 1,270 कर्मचारियों का समर्थन हासिल कर इस गुट ने अहिर समर्थक पैनल के सामने मजबूत चुनौती पेश की।
नतीजे आने के बाद श्रमिक उत्कर्ष सभा ने 129 में से 110 सीटें जीतकर बड़ी सफलता हासिल की। अब निर्वाचित सदस्यों में से संगठन की नई कार्यकारिणी का चुनाव किया जाएगा। ऐसे में नई कार्यकारिणी पर भी श्रमिक उत्कर्ष सभा का वर्चस्व कायम होने की संभावना है।
■ तीन दशक से नहीं हुआ था चुनाव
संगठन में करीब 30 वर्षों से चुनाव नहीं होने के कारण कार्यकारिणी पर सचिन अहिर समर्थकों का प्रभाव बना हुआ था। चुनाव कराने की मांग को लेकर कर्मचारियों के एक गुट ने न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया था। इसके अलावा संगठन के फंड के लेन-देन को लेकर भी कुछ कर्मचारियों ने आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
इस मामले की सुनवाई बॉम्बे हाईकोर्ट में हुई थी और अदालत के निर्देशों के बाद चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।
■ अहिर के लिए राजनीतिक झटका
सचिन अहिर शिवसेना (ठाकरे गुट) के विधायक हैं और हाल ही में शिंदे गुट के समर्थन से विधान परिषद के उपसभापति पद पर निर्विरोध चुने गए थे। उनके उपसभापति बनने के बाद महज एक महीने के भीतर मुंबई की बड़ी निजी कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा की कर्मचारी यूनियन में उनके समर्थक गुट को मिली करारी हार को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
■ ‘यह जीत कामगारों की एकजुटता की’
विधायक प्रसाद लाड ने कहा कि यह जीत किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि कामगारों की एकता, विश्वास और एकजुटता की जीत है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के अधिकारों और कल्याण के लिए प्रभावी ढंग से काम किया जाएगा।वहीं, सचिन अहिर समर्थित गुट की ओर से चुनाव परिणाम पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।
■ पिछले 30 वर्षों के लेन-देन की जांच का दावा
नवनिर्वाचित गुट के नेता सुहास गोरे ने कहा कि पिछली कार्यकारिणी के प्रति कर्मचारियों का विश्वास खत्म हो गया था और उनकी टीम उस विश्वास को फिर से हासिल करने में सफल रही है।
उन्होंने कहा कि अब पिछले 30 वर्षों के कर्मचारी निधि और मेडिक्लेम योजनाओं से जुड़े लेन-देन की जांच की जाएगी। इससे संगठन के पुराने आर्थिक व्यवहारों की भी समीक्षा होने के संकेत मिले हैं।


