■ भाजपा नगरसेवक तेजिंदर सिंह तिवाना ने बीएमसी आयुक्त को लिखा पत्र, सभी आवासीय परियोजनाओं को समान स्वच्छता सेवा देने पर जोर
मुंबई वार्ता संवाददाता

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा प्रस्तावित नई ‘बृहन्मुंबई स्वच्छता सेवा योजना’ में म्हाडा की सभी आय वर्ग की इमारतों, झुग्गी पुनर्विकास प्राधिकरण (एसआरए) परियोजनाओं तथा परियोजना प्रभावित व्यक्तियों (पीएपी) के आवासों को शामिल करने की मांग तेज हो गई है। प्रभाग क्रमांक 47 के पार्षद तेजिंदर सिंह तिवाना ने इस संबंध में बीएमसी आयुक्त को पत्र लिखकर योजना का दायरा बढ़ाने और सभी नागरिकों को समान स्वच्छता सेवाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।


बीएमसी द्वारा वर्ष 2013 से संचालित ‘स्वच्छ मुंबई प्रबोधन अभियान’ की समीक्षा कर आधुनिक तकनीक आधारित ‘बृहन्मुंबई स्वच्छता सेवा योजना’ लागू करने को लेकर गटनेताओं की बैठक में सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है। इसी संदर्भ में तिवाना ने मौजूदा व्यवस्था की कमियों की ओर ध्यान आकर्षित किया है।
अपने पत्र में उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था के तहत मुख्य रूप से केवल म्हाडा के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) की इमारतों को ही स्वच्छता सेवाएं प्रदान की जाती हैं, जबकि निम्न आय वर्ग (एलआईजी), मध्यम आय वर्ग (एमआईजी), उच्च आय वर्ग (एचआईजी) की इमारतों के साथ-साथ एसआरए और पीएपी आवासों जैसी बड़ी आबादी को इस सुविधा से वंचित रखा गया है।
तिवाना ने चेतावनी दी कि घनी आबादी वाले इन क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन और स्वच्छता की अनदेखी से दुर्गंध, मच्छरों का प्रकोप और संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता और स्वास्थ्य किसी एक आर्थिक वर्ग तक सीमित विषय नहीं हैं, बल्कि यह सभी करदाताओं के अधिकारों और नगर निगम की जिम्मेदारी से जुड़ा हुआ मुद्दा है।
पार्षद ने अपने पत्र में यह भी कहा कि ‘स्वच्छ मुंबई’ केवल एक नारा बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका लाभ शहर के प्रत्येक नागरिक तक समान रूप से पहुंचना चाहिए। उन्होंने पुनर्वास कॉलोनियों, संक्रमण शिविरों तथा सभी आवासीय परियोजनाओं को प्रस्तावित योजना में शामिल करने और इस संबंध में शीघ्र नीतिगत निर्णय लेने की मांग की है।


