MMRDA के स्पष्टीकरण से संदेह दूर नहीं, सवाल और गंभीर हुए: धनंजय शिंदे।

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■ परीक्षा प्रक्रिया का डेटा सार्वजनिक कर हाईकोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र SIT जांच की मांग

मुंबई वार्ता संवाददाता

कांग्रेस महासचिव धनंजय शिंदे ने MMRDA की भर्ती परीक्षा को लेकर जारी स्पष्टीकरण पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इससे संदेह दूर होने के बजाय मामले से जुड़े सवाल और गंभीर हो गए हैं। उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए सभी तकनीकी डेटा सार्वजनिक करने तथा उच्च न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र SIT से जांच कराने की मांग की है।


धनंजय शिंदे ने कहा कि MMRDA की ओर से जारी स्पष्टीकरण में एक बार फिर केवल यह कहा गया है कि TCS सरकार द्वारा मान्य है और Normalisation भी शासन द्वारा मान्य प्रक्रिया के अनुसार किया गया है। लेकिन उनका सवाल Normalisation की वैधता को लेकर नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर है।


उन्होंने सवाल उठाया कि 200 में से 200 Normalised Marks कैसे मिले, इसका जवाब केवल Normalisation Formula बताने से नहीं मिल सकता। इसके लिए परीक्षा के Raw Marks, Shift-wise Mean और Standard Deviation, Normalisation Data, Response Sheets, Server Logs, CCTV Footage तथा अन्य Technical Audit Records की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।


Final Merit List अभी Verification में, फिर क्लीन चिट कैसे?
शिंदे ने कहा कि MMRDA ने खुद स्वीकार किया है कि Final Merit List अभी Verification प्रक्रिया में है। ऐसे में स्वतंत्र जांच पूरी होने से पहले ही यह निष्कर्ष कैसे निकाला जा सकता है कि परीक्षा में कोई गड़बड़ी नहीं हुई?
उन्होंने कहा कि 340 आपत्तियों का निपटारा कर देना परीक्षा प्रक्रिया में संभावित अनियमितताओं की जांच पूरी होने का प्रमाणपत्र नहीं है। परीक्षा से जुड़े सभी संदेहों का जवाब तथ्यों और तकनीकी डेटा के आधार पर दिया जाना चाहिए।

■ ‘दोषियों को संरक्षण नहीं, निर्दोषों के साथ अन्याय भी नहीं’


धनंजय शिंदे ने कहा कि उनकी मांग स्पष्ट है कि परीक्षा से संबंधित सभी डेटा और रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं तथा पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक किए जाएं। इसके साथ ही पूरे मामले की उच्च न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र SIT के माध्यम से जांच कराई जाए।


उन्होंने कहा कि किसी भी निर्दोष उम्मीदवार के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए, लेकिन यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसे किसी भी तरह का संरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए।


उन्होंने कहा, “न दोषियों को संरक्षण मिले, न ईमानदार उम्मीदवारों के साथ अन्याय हो। डेटा सार्वजनिक करें, स्वतंत्र जांच करें और सच्चाई सामने लाएं।”

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