मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र की करीब 70 हजार पात्र हाउसिंग सोसायटियों के लिए ‘डीम्ड कन्व्हेअन्स’ की प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य में बड़ी संख्या में ऐसी सहकारी गृहनिर्माण संस्थाएं हैं, जिनके नाम पर जमीन और इमारत का कानूनी स्वामित्व हस्तांतरित नहीं हुआ है। इसके कारण सोसायटियों को पुनर्विकास, मरम्मत और संपत्ति संबंधी निर्णयों में अड़चनों का सामना करना पड़ता है।


राज्य में लगभग 1.25 लाख पंजीकृत हाउसिंग सोसायटियां हैं। इनमें 70 हजार से अधिक सोसायटियां ऐसी बताई गई हैं, जो डीम्ड कन्व्हेअन्स के लिए पात्र हैं। डीम्ड कन्व्हेअन्स मिलने के बाद जमीन और इमारत पर सोसायटी का कानूनी अधिकार मजबूत होता है और पुनर्विकास की प्रक्रिया आसान हो जाती है।
■ ऑनलाइन प्रक्रिया से मिलेगी राहत
सरकार ने मई 2025 में PRATYAY MahaBhumi ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया था। इसके माध्यम से पात्र सोसायटियां डीम्ड कन्व्हेअन्स के लिए आवेदन से लेकर प्रमाणपत्र प्राप्त करने तक की प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी कर सकती हैं। इस व्यवस्था में सरकारी कार्यालयों के चक्कर कम होंगे और सुनवाई व संवाद भी ऑनलाइन किया जा सकता है। प्रक्रिया को छह महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
■ स्व-पुनर्विकास को मिलेगा प्रोत्साहन
डीम्ड कन्व्हेअन्स का सीधा लाभ उन सोसायटियों को मिल सकता है, जो अपने स्तर पर इमारत का पुनर्विकास करना चाहती हैं। जमीन का स्पष्ट कानूनी अधिकार मिलने से सोसायटी को डेवलपर पर निर्भर रहने के बजाय स्व-पुनर्विकास (Self-Redevelopment) का विकल्प अपनाने में सुविधा होगी।
स्व-पुनर्विकास को बढ़ावा देने के लिए कर छूट और अन्य प्रोत्साहनों की व्यवस्था किए जाने की बात भी सामने आई है। इसका उद्देश्य पुरानी इमारतों के पुनर्विकास को गति देना और सोसायटी के सदस्यों को विकास प्रक्रिया में अधिक नियंत्रण देना है।
■ पुनर्विकास के लिए क्यों जरूरी है कन्व्हेअन्स?
कन्व्हेअन्स का अर्थ जमीन और इमारत पर विकासक/मालिक से सोसायटी के नाम कानूनी अधिकार का हस्तांतरण है। महाराष्ट्र ओनरशिप फ्लैट्स एक्ट (MOFA) के तहत बिल्डर द्वारा निर्धारित अवधि में कन्व्हेअन्स नहीं किए जाने पर सोसायटी डीम्ड कन्व्हेअन्स के लिए आवेदन कर सकती है।
कन्व्हेअन्स नहीं होने की स्थिति में सोसायटी को जमीन के मालिकाना हक, अतिरिक्त एफएसआई/टीडीआर तथा पुनर्विकास से जुड़े अधिकारों को लेकर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
■ बिल्डर की आपत्ति से रुकेगा नहीं कन्व्हेअन्स
हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में मिलने वाले अतिरिक्त एफएसआई का हवाला देकर बिल्डर सोसायटी के कन्व्हेअन्स को अनिश्चितकाल तक टाल नहीं सकता। अदालत के इस रुख से मुंबई और आसपास की उन सोसायटियों को राहत मिल सकती है, जहां पुनर्विकास के लिए कन्व्हेअन्स सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।
सरकार की ऑनलाइन व्यवस्था, डीम्ड कन्व्हेअन्स को गति देने के प्रयास और स्व-पुनर्विकास के लिए प्रस्तावित प्रोत्साहन से हजारों पुरानी हाउसिंग सोसायटियों को अपनी संपत्ति पर अधिक कानूनी अधिकार और पुनर्विकास का बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है।


