मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चलाने वाले चालकों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य किए जाने के बाद अब नियमों का पालन नहीं करने वालों पर कार्रवाई शुरू हो गई है। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि महाराष्ट्र में व्यवसाय करना है तो यहां की मराठी भाषा और संस्कृति का सम्मान करना होगा।


सरनाईक के मुताबिक, 1989 के महाराष्ट्र मोटर वाहन नियमों के तहत ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी का व्यावहारिक ज्ञान जरूरी है। सरकार ने गैर-मराठी भाषी चालकों को भाषा सीखने के लिए करीब 105 दिनों का समय दिया था। यह अवधि पूरी होने के बाद अब परिवहन विभाग ने नियमों के पालन की जांच शुरू कर दी है।
■ 1.65 लाख से अधिक चालकों ने लिया प्रशिक्षण
परिवहन मंत्री के अनुसार, मराठी भाषा प्रशिक्षण अभियान के तहत करीब 1 लाख 65 हजार 600 ऑटो और टैक्सी चालकों ने प्रशिक्षण पूरा किया है। जिन चालकों को अभी मराठी सीखने की आवश्यकता है, उनके लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था आगे भी जारी रखने की बात कही गई है।
■ पहले नोटिस, फिर कड़ी कार्रवाई
सरकार के नियमों के अनुसार, जांच के दौरान यदि कोई चालक मराठी में बुनियादी बातचीत करने में सक्षम नहीं पाया जाता है तो उसे पहले नोटिस दिया जाएगा। इसके बाद भी सुधार नहीं होने पर लाइसेंस, बैज या परमिट के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
सरनाईक ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी की रोजी-रोटी छीनना नहीं है। महाराष्ट्र में दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों का स्वागत है और वे यहां व्यवसाय कर सकते हैं, लेकिन राज्य में रहते और काम करते समय मराठी भाषा का सम्मान करना आवश्यक है।
■ नए ऑटो-टैक्सी बैज के लिए भी मराठी की जांच
परिवहन विभाग ने नए ऑटो-रिक्शा और टैक्सी बैज जारी करते समय मराठी भाषा के ज्ञान की जांच को भी अधिक पारदर्शी बनाने का फैसला किया है। रिपोर्टों के अनुसार, 20 अगस्त 2026 से नए बैज के लिए होने वाली मराठी भाषा जांच की वीडियोग्राफी शुरू की जाएगी।
सरनाईक ने दोहराया कि महाराष्ट्र में यात्रियों से संवाद करने वाले व्यावसायिक वाहन चालकों को बुनियादी मराठी बोलना और समझना आना चाहिए। नियमों का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ अब परिवहन विभाग कार्रवाई करेगा।


