मुंबई वार्ता संवाददाता

‘एक देश, एक चुनाव’ के मुद्दे पर मुंबई में आयोजित राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में पूर्व उच्च न्यायालय के न्यायमूर्तियों, पूर्व जिला न्यायाधीशों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं, शिक्षाविदों, अर्थशास्त्रियों और अन्य विशेषज्ञों सहित करीब 50 गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया। ज्यूरिस्ट्स फॉर जस्टिस फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में देशभर में एक साथ चुनाव कराने के संवैधानिक, प्रशासनिक, न्यायिक और आर्थिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। सम्मेलन के अंत में ‘एक देश, एक चुनाव’ के समर्थन में प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया।


कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि एवं उपस्थित वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद ज्यूरिस्ट्स फॉर जस्टिस फाउंडेशन के अध्यक्ष उमेश कुमार सिरोही ने स्वागत भाषण दिया और सम्मेलन के उद्देश्य तथा प्रमुख लक्ष्यों की जानकारी दी। कार्यक्रम में सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का गायन भी किया गया।
सम्मेलन के मुख्य विषय पर प्रो. प्रितेश आर्टे ने मुख्य वक्तव्य दिया। इसके बाद राउंड टेबल चर्चा में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।
पूर्व न्यायमूर्ति बी. पी. देशपांडे ने एक साथ चुनाव के संवैधानिक पहलुओं पर प्रकाश डाला, जबकि पूर्व जिला न्यायाधीश मीराताई खडक्कर ने प्रस्ताव के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।
वरिष्ठ अधिवक्ता एवं भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने एक साथ चुनाव के क्रियान्वयन से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा की और इसके समर्थन में अपने विचार रखे।
पूर्व सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) अविनाश धर्माधिकारी ने बार-बार होने वाले चुनावों के दौरान पुलिस प्रशासन पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि एक साथ चुनाव कराने से पुलिस व्यवस्था पर पड़ने वाले इस अतिरिक्त दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट रवि पानी ने एक साथ चुनाव के आर्थिक एवं वित्तीय लाभों पर प्रकाश डाला। वहीं प्रो. अधिवक्ता दीपक परमार, जो बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) के विशेषज्ञ हैं, ने प्रस्ताव के व्यापक लाभों तथा IPR क्षेत्र से इसके संभावित संबंधों पर चर्चा की।
पूर्व प्रधान जिला न्यायाधीश एवं महाराष्ट्र राज्य विशेष सार्वजनिक सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के वर्तमान सदस्य नागेश वी. न्हवकर ने ‘एक देश, एक चुनाव’ के संवैधानिक पहलुओं पर विस्तार से अपनी बात रखी। पूर्व जिला न्यायाधीश चंदा नथानी ने भी प्रस्ताव के प्रति समर्थन व्यक्त किया।
■ मंगल प्रभात लोढ़ा ने भी किया समर्थन
सम्मेलन के मुख्य अतिथि महाराष्ट्र सरकार के कौशल, रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार विभाग के कैबिनेट मंत्री तथा मलबार हिल विधानसभा क्षेत्र के विधायक मंगल प्रभात लोढ़ा ने भी ‘एक देश, एक चुनाव’ का समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि एक साथ चुनाव होने से प्रशासन की कार्यक्षमता बढ़ेगी और देश के विकास को गति मिलेगी।
उन्होंने कहा, “भारत दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे प्राचीन लोकतंत्र वाला देश है। ‘एक देश, एक चुनाव’ के प्रस्ताव से सरकार की कार्यक्षमता बढ़ेगी और देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और मजबूती मिलेगी। इसलिए यह देशहित में अत्यंत लाभकारी प्रस्ताव है।”
चर्चा के दौरान कुछ मतभिन्न विचार भी सामने आए, लेकिन सम्मेलन में प्रस्ताव के समर्थन में व्यापक सहमति बनी। इसके बाद प्रस्ताव का मसौदा प्रस्तुत किया गया और आवश्यक स्पष्टीकरणों के बाद ‘एक देश, एक चुनाव’ के समर्थन में प्रस्ताव औपचारिक रूप से पारित किया गया।
- ■ पूर्व न्यायमूर्ति विवेक भारती शर्मा ने किया समापन
सम्मेलन का समापन पूर्व न्यायमूर्ति विवेक भारती शर्मा के संबोधन से हुआ। उत्तराखंड में न्यायाधीश के रूप में अपने व्यक्तिगत अनुभवों का उल्लेख करते हुए उन्होंने ‘एक देश, एक चुनाव’ के समर्थन में अपने विचार रखे। उन्होंने इस विषय के न्यायिक, संवैधानिक, प्रशासनिक और आर्थिक पहलुओं पर भी चर्चा की।
इसके बाद फाउंडेशन के अध्यक्ष उमेश कुमार सिरोही ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया। उन्होंने चर्चा के दौरान सामने आए विभिन्न विचारों का उल्लेख करते हुए कहा, “बार-बार होने वाले चुनाव देश के लिए वायरल बुखार जैसे हैं, जबकि ‘एक देश, एक चुनाव’ इस राजनीतिक बीमारी के लिए प्रभावी टीकाकरण जैसा है। यह भारत सरकार की एक अत्यंत अच्छी पहल है।”
कार्यक्रम के अंत में आयोजन समिति के अध्यक्ष अमरनाथ मिश्रा ने मुख्य अतिथि, सम्माननीय अतिथियों, वक्ताओं, सहभागी प्रतिनिधियों तथा आयोजन एवं विषय समिति के सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। इसके बाद मुख्य अतिथि, अतिथियों, वक्ताओं और सम्मेलन में शामिल गणमान्य व्यक्तियों के साथ सामूहिक छायाचित्र भी लिया गया।


