मुंबई वार्ता संवाददाता

निजी विश्वविद्यालयों को फीस नियामक प्राधिकरण (FRA) के दायरे में लाने को लेकर राज्य सरकार की ओर से चल रही कवायद पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेता एडवोकेट अमोल मातले ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि निजी विश्वविद्यालयों की फीस पर नियंत्रण को लेकर अब सरकार की ओर से की जा रही चर्चा केवल ‘देर से आई समझदारी’ है।


अमोल मातले ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी में व्यस्त है और निजी विश्वविद्यालयों तथा स्वायत्त शिक्षण संस्थानों के माध्यम से महाराष्ट्र के लाखों विद्यार्थियों और अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की आंखों पर भ्रष्टाचार की पट्टी बंधी होने के कारण उसे विद्यार्थियों और अभिभावकों का आक्रोश दिखाई नहीं दे रहा था।
उन्होंने कहा कि दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर देश और राज्य के विद्यार्थियों ने प्रशासन तथा फीस से जुड़े कथित अन्यायपूर्ण नीतियों के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया। इस आंदोलन के दबाव के बाद सरकार और प्रशासन की नींद खुली है। विद्यार्थियों के आक्रोश के सामने सरकार को झुकना पड़ा है और अब निजी विश्वविद्यालयों की फीस को नियंत्रित करने के उपायों पर विचार शुरू किया गया है।
■ सरकार से तीन प्रमुख मांगें
आगामी अधिवेशन में कानून में संशोधन: मातले ने मांग की कि केवल खबरों और चर्चाओं तक सीमित रहने के बजाय आगामी विधानसभा अधिवेशन में फीस नियामक प्राधिकरण (FRA) से संबंधित कानून में ठोस और कठोर संशोधन किया जाए।
मनमानी फीस पर रोक: उन्होंने कहा कि निजी विश्वविद्यालयों के सभी व्यावसायिक और गैर-व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को सीधे FRA के प्रभावी नियंत्रण में लाया जाए, ताकि विद्यार्थियों से मनमानी और अवाजवी फीस वसूली पर रोक लग सके।
निजी संस्थानों के वित्तीय लेन-देन की जांच: मातले ने उन निजी विश्वविद्यालयों के वित्तीय व्यवहार की निष्पक्ष जांच की मांग की, जिन पर विद्यार्थियों से अत्यधिक फीस वसूलने के आरोप हैं।
■ कानून नहीं बना तो आंदोलन की चेतावनी
एडवोकेट अमोल मातले ने चेतावनी दी कि यदि आगामी अधिवेशन में सरकार ने फीस नियंत्रण के मुद्दे पर तत्काल ठोस कानून बनाकर उसे लागू नहीं किया, तो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) विद्यार्थियों के अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरेगी और सरकार के खिलाफ पहले से अधिक तीव्र आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के साथ फीस के नाम पर किसी भी तरह की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


