मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई महानगरपालिका (BMC) में अधिकारी और कर्मचारियों के तबादलों को लेकर राजनीतिक सिफारिशों का मामला सामने आया है। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत उपलब्ध कराई गई एक सूची में 225 अधिकारी-कर्मचारियों के नामों के सामने मंत्री, विधायक, सांसद और अन्य जनप्रतिनिधियों के नाम दर्ज हैं। सूची में सहायक अभियंता (AE), उप अभियंता (SE), कार्यकारी अभियंता (EE) और कनिष्ठ अभियंता (JE) जैसे पदों पर कार्यरत अधिकारियों-कर्मचारियों का समावेश है।


यह जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को महानगरपालिका के नगर अभियंता कार्यालय से प्राप्त हुई है। सूची में दर्ज नामों का प्रारंभिक विश्लेषण करने पर कई राजनीतिक नेताओं के नाम एक से अधिक बार सामने आए हैं। हालांकि, केवल किसी नेता का नाम सूची में दर्ज होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि संबंधित तबादला वास्तव में उसी नेता के दबाव या हस्तक्षेप से हुआ।
■ एकनाथ शिंदे का नाम सबसे अधिक
उपलब्ध सूची के प्रारंभिक विश्लेषण के अनुसार, एकनाथ शिंदे का नाम 10 बार दर्ज है, जो सबसे अधिक है। इसके बाद रामदास आठवले का नाम 9 बार सामने आया है। गिरीश महाजन और कालिदास कोळंबकर के नाम 7-7 बार दर्ज हैं।
इसके अलावा मंगेश कुडाळकर, अण्णा बनसोडे और तुकाराम काते के नाम 6-6 बार, जबकि मुरजी पटेल और दिलीप लांडे के नाम 5-5 बार दर्ज हैं।
नरहरी झिरवळ, सुमित वानखेडे, राहुल शेवाळे, प्रकाश सुर्वे, इंद्रनील नाईक, संतोष बांगर, राम कदम, किशन कथोरे और बच्चू कडू के नाम 4-4 बार सामने आए हैं।
वहीं चंद्रशेखर बावनकुळे, हसन मुश्रीफ, भरतशेठ गोगावले, उदय सामंत, परिणय फुके, रविंद्र वायकर, प्रसाद लाड, सुनील प्रभू, महेश सावंत और प्रवीण दरेकर के नाम 3-3 बार दर्ज हैं।
प्रतापराव जाधव, पंकजा मुंडे, मंगलप्रभात लोढा, रावसाहेब दानवे, संजय घाडी, राहुल नार्वेकर, जयकुमार गोरे और सना मलिक के नाम 2-2 बार, जबकि रविंद्र चव्हाण, चंद्रकांत पाटील और संजय बनसोडे के नाम एक-एक बार दर्ज होने की बात सामने आई है।
■ राजनीतिक सिफारिशों पर सवाल
आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने कहा कि महानगरपालिका में तबादले प्रशासनिक आवश्यकता, वरिष्ठता और पारदर्शी नियमों के आधार पर होने चाहिए। ऐसे में 225 अधिकारी-कर्मचारियों के नामों के सामने राजनीतिक पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के नाम वाली सूची सामने आना गंभीर सवाल खड़े करता है।
गलगली के अनुसार, यदि अधिकारियों या कर्मचारियों के तबादलों के लिए राजनीतिक दबाव अथवा सिफारिशों का इस्तेमाल किया गया है, तो महानगरपालिका प्रशासन को इसकी जांच करनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि महानगरपालिका आयुक्त मौजूदा नियमों के अनुसार राजनीतिक दबाव डालने वाले अधिकारी वर्ग के खिलाफ आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई करें।
■ सूची में कई नेताओं के नाम
सूची में अलग-अलग अधिकारी-कर्मचारियों के नाम के सामने राजनीतिक नेताओं के नाम दर्ज हैं। इनमें एकनाथ शिंदे, रामदास आठवले, गिरीश महाजन, कालिदास कोळंबकर, मंगेश कुडाळकर, अण्णा बनसोडे, तुकाराम काते, मुरजी पटेल, दिलीप लांडे, नरहरी झिरवळ, राहुल शेवाळे, प्रकाश सुर्वे, उदय सामंत, रविंद्र वायकर, प्रसाद लाड, सुनील प्रभू, पंकजा मुंडे, मंगलप्रभात लोढा, रावसाहेब दानवे और अन्य जनप्रतिनिधियों के नाम शामिल हैं।
सूची में कई अधिकारियों के सामने एक से अधिक नेताओं के नाम भी दर्ज हैं। उदाहरण के तौर पर कुछ अधिकारियों के नाम के सामने दो या तीन राजनीतिक व्यक्तियों के नाम दर्ज हैं।
■ प्रशासनिक पारदर्शिता पर उठे सवाल
महानगरपालिका में इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी और कर्मचारी महत्वपूर्ण नागरिक परियोजनाओं, सड़क, पुल, भवन, जलनिकासी और अन्य बुनियादी ढांचा संबंधी कार्यों से जुड़े होते हैं। ऐसे में तबादलों की प्रक्रिया में यदि राजनीतिक सिफारिशों की भूमिका है, तो इससे प्रशासनिक पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
फिलहाल सामने आई सूची राजनीतिक सिफारिशों के उल्लेख का दस्तावेज है; यह अपने आप में यह निर्णायक प्रमाण नहीं है कि सूची में दर्ज प्रत्येक सिफारिश के आधार पर तबादला किया ही गया था। इसलिए पूरे मामले में महानगरपालिका प्रशासन की ओर से सूची की सत्यता, सिफारिशों की प्रकृति और उनके आधार पर लिए गए निर्णयों की जांच महत्वपूर्ण होगी।


