मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल (MSRTC) ने अपने कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत चालक, वाहक समेत अन्य कर्मचारियों को ड्यूटी के दौरान रील्स, वीडियो, शॉर्ट्स या लाइव स्ट्रीमिंग करने पर रोक लगा दी गई है। खास तौर पर बस चलाते समय सोशल मीडिया कंटेंट बनाने को गंभीरता से लिया गया है।


■ गणवेश में भी वीडियो बनाने पर रोक
नए निर्देशों के अनुसार कर्मचारी ड्यूटी के दौरान ही नहीं, बल्कि एसटी डिपो, बस स्टेशन, कार्यालय और एसटी बसों में गणवेश पहनकर व्यक्तिगत सोशल मीडिया कंटेंट बनाने से भी बचेंगे। निगम की छवि खराब करने वाले वीडियो या पोस्ट सोशल मीडिया पर साझा करने पर भी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
गोपनीय जानकारी साझा करने पर भी कार्रवाई
MSRTC ने कर्मचारियों को निगम की गोपनीय, आंतरिक या प्रशासनिक जानकारी, फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने के निर्देश दिए हैं। नियमों का उल्लंघन होने पर संबंधित कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा सकता है और MSRTC के अनुशासनात्मक नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
■ प्रचार के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल
हालांकि, निगम ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई है। MSRTC अब सोशल मीडिया को प्रचार और जनसंपर्क के माध्यम के रूप में इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है। सोशल मीडिया पर सक्रिय कर्मचारियों को निगम की सकारात्मक गतिविधियों को लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
इसके तहत यात्री सुविधाओं, एसटी की विभिन्न योजनाओं, जनकल्याणकारी पहलों, स्वच्छता अभियानों और सड़क सुरक्षा अभियानों से संबंधित रील्स एवं वीडियो बनाए जा सकेंगे। हालांकि, ऐसे कंटेंट के लिए सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति जरूरी होगी।
■ पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
सोशल मीडिया पर रील बनाने को लेकर MSRTC पहले भी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है। अगस्त 2026 में पनवेल डिपो के तीन कर्मचारियों को ड्यूटी के दौरान गणवेश में रील बनाने के मामले में निलंबित किया गया था। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अधिकारियों ने कार्रवाई की थी।
MSRTC का यह कदम एक ओर ड्यूटी के दौरान कर्मचारियों का ध्यान यात्रियों की सुरक्षा और जिम्मेदारियों पर केंद्रित करने, तो दूसरी ओर सोशल मीडिया की पहुंच का इस्तेमाल निगम की योजनाओं और जनहित अभियानों के प्रचार के लिए करने की दोहरी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।


