मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई के पूर्व उप महापौर और शिवसेना नेता बाबू भाई भवानजी ने कहा है कि बाढ़ से बर्बाद हो चुके नेपाल के लोगों के जीवन को पटरी पर लाने के लिए भारत के लोगों और भारत सरकार को आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि नेपाल के पुनर्वास के लिए भारत सरकार को उपकर लगाकर एक विशेष कोष तैयार करना चाहिए।


आज एक बयान में भवानजी ने कहा कि नेपाल हमारा सगा भाई है। प्राचीन काल से नेपाल हमारा करीबी सहयोगी रहा है और उससे हमारे रोटी बेटी के रिश्ते रहे हैं। आज नेपाल के लोग बहुत संकट में हैं। उनकी मदद के लिए सभी को आगे आना चाहिए। जिस तरह बांग्लादेश के निर्माण के समय इंदिरा गांधी ने एक विशेष कर लगाकर बांग्लादेश की मदद की थी आज उसी प्रकार का विशेष कर लगाकर नेपाल की भी मदद किए जाने की जरूरत है।
बता दें कि भारत ने बाढ़ प्रभावित नेपाल में राहत अभियान तेज कर दिया है और आपातकालीन सामग्री की पांचवीं खेप भेजी है। नेपाल में भारत के राजदूत ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि राहत और बचाव सहायता लेकर पांचवां भारतीय विमान आज दोपहर नेपाल पहुंचा। विमान में सुरंग बचाव के विशेष उपकरणों से लैस 11 सदस्यीय बचाव दल और साढे पांच टन आवश्यक दवाएं थीं।
हिमस्खलन से आई अचानक बाढ़ ने पिछले महीने 26 अगस्त को उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया था। भारतीय वायु सेना ने प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक सामग्री पहुंचाने के लिए कई उड़ानें भरी हैं। भारत ने विशेष तलाश और बचाव सहायता भी प्रदान की है। भारतीय टीमें पनबिजली सुरंगों के आसपास के अभियानों में और बड़ी संख्या में हताहतों और लापता लोगों के बीच पीड़ितों की पहचान के लिए फोरेंसिक प्रयासों में शामिल हैं।
इस बीच, नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने आज संसद में विनाशकारी बाढ़ के प्रति भारत की त्वरित प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद व्यक्त किया। बचाव दल सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में जीवित बचे लोगों और लापता लोगों की तलाश जारी रखे हुए हैं। हिमालयी देश में विनाशकारी अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर एक हजार दो सौ चार हो गई है, जबकि लगभग चार हजार दो सौ 16 लोग अभी भी लापता हैं। बचावकर्मी बारिश और मलबे से जूझते हुए उन लोगों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं जिनके बारे में माना जाता है कि वे भोटेकोशी नदी के मार्ग पर बनी सुरंगों और भूमिगत बिजली संयंत्रों में फंसे हुए हैं।
प्रधानमंत्री ने प्रतिनिधि सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आपदा की भयावहता और प्रकृति ने जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्र में रहने वाले लोगों के सामने बढ़ते जोखिमों के बारे में गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। श्री शाह ने कहा कि विशेषज्ञों ने इस क्षेत्र की सबसे बड़ी आपदाओं में से एक इस त्रासदी को उच्च हिमालय में बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन का परिणाम बताया है।
उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर संकेत है कि जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ हिमालयी क्षेत्र में उन्हें जिन जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है, वे भी बढ़ रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया के योगदान का परिणाम है और इसके प्रभावों को कम करना और उनका प्रबंधन करना वैश्विक समुदाय की साझा जिम्मेदारी है।*


