मुंबई वार्ता संवाददाता

श्री नारायण भक्ति पंथ के संस्थापक सद्गुरु संत श्री लोकेशानंदजी महाराज के मार्गदर्शन में ‘महाविष्णु की महायात्रा’ (श्री नारायण रथ यात्रा) का शुभारंभ मुंबई से किया जाएगा। यह ऐतिहासिक आध्यात्मिक यात्रा 21 और 22 जनवरी 2027 को महालक्ष्मी रेसकोर्स से शुरू होगी और अगले 12 वर्षों तक देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचेगी।


इस यात्रा का उद्देश्य भगवान महाविष्णु की शेषशायी स्वरूप वाली विशाल पंचधातु महामूर्ति के दर्शन करोड़ों श्रद्धालुओं को कराना तथा ‘एक महामूर्ति, एक महायात्रा और एक सनातन चेतना’ के संदेश के माध्यम से देशभर में आध्यात्मिक जागरण का प्रयास करना है।


■ मुंबई-महाराष्ट्र में इन प्रमुख स्थानों से गुजरेगी यात्रा
महायात्रा के पहले चरण में पवित्र रथ मुंबई और आसपास के प्रमुख क्षेत्रों से होकर गुजरेगा। इसमें महालक्ष्मी, सिद्धिविनायक, माटुंगा, अंधेरी ईस्ट, मुलुंड, ठाणे, कल्याण और नवी मुंबई शामिल हैं। इसके बाद यात्रा महाराष्ट्र के सभी जिलों में जाएगी।
आयोजकों के अनुसार, महाराष्ट्र के इस चरण में अनुमानित 30 करोड़ भक्तों और अन्य लोगों को महामूर्ति के प्रत्यक्ष दर्शन का अवसर मिलने की उम्मीद है।
■ 15 फुट लंबी है महाविष्णु की महामूर्ति
आयोजकों के मुताबिक, यात्रा में भगवान महाविष्णु की शेषशायी स्वरूप वाली ठोस पंचधातु महामूर्ति शामिल होगी। महामूर्ति की लंबाई करीब 15 फुट और शेषनाग के फन की ऊंचाई करीब 7 फुट बताई गई है। इसका अनुमानित वजन करीब 9 टन है।
प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि महामूर्ति में 12 किलो सोना, 300 किलो चांदी, तांबा, जिंक और अन्य पवित्र धातुओं का इस्तेमाल किया गया है। इसे 30 कुशल कारीगरों ने करीब 12 महीनों में तैयार किया और इसकी लागत लगभग 30 करोड़ रुपये बताई गई है।
■ शहादा में है श्री नारायणपुरम् धाम
श्री नारायण भक्ति पंथ का प्रमुख तीर्थस्थल श्रीश्रीनारायणपुरम् धाम महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले के शहादा में स्थित है। यहां शेषशायी नारायण भगवान का पंचधातु विग्रह स्थापित है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह विग्रह करीब 11 फुट ऊंचा और 21 टन वजनी है।
संत श्री लोकेशानंदजी महाराज के सान्निध्य में श्रद्धालुओं को सत्संग, कथा और नारायण भक्ति का अवसर मिलता है। पंथ की ओर से भक्ति, संस्कार, आध्यात्मिक जागरण और व्यसनमुक्त समाज निर्माण को अपने प्रमुख उद्देश्यों में बताया गया है।
■ 15 वर्ष की उम्र से शुरू की साधना
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सद्गुरु श्री लोकेशानंदजी महाराज का जन्म 21 फरवरी 1980 को इंदौर, मध्य प्रदेश में हुआ। उन्होंने 15 वर्ष की आयु में स्वामी श्री अच्युतानंदजी महाराज के सान्निध्य में साधना शुरू की। 12 वर्षों की कठोर तपस्या के बाद उन्होंने 2016 में श्री नारायण भक्ति पंथ की स्थापना की और नंदुरबार के शहादा में श्री नारायणपुरम् तीर्थ की स्थापना की।
महाविष्णु की प्रस्तावित 12 वर्षीय यात्रा के माध्यम से आयोजकों का लक्ष्य देशभर में भगवान महाविष्णु के दर्शन पहुंचाने के साथ सनातन चेतना और आध्यात्मिक जागरण का संदेश प्रसारित करना है।


