मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल (एमएसआरटीसी) के बेड़े के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। महामंडल ने 5,000 नई ‘लालपरी’ बसों की खरीद के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली है। परिवहन मंत्री एवं एमएसआरटीसी के अध्यक्ष प्रताप सरनाईक ने रविवार को इसकी जानकारी दी।


निविदा प्रक्रिया में टाटा मोटर्स सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (एल-1) के रूप में सामने आई है। नई बसों को एमएसआरटीसी के बेड़े में शामिल करने से लंबे समय से चल रही पुरानी बसों की समस्या को कम करने और यात्रियों को बेहतर तथा अधिक भरोसेमंद परिवहन सेवा उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।
एमएसआरटीसी इस समय पुराने बस बेड़े के कारण कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। बड़ी संख्या में बसें 12 से 14 वर्ष पुरानी हो चुकी हैं, जिसके कारण बार-बार खराबी, बसों के बंद होने और कुछ मार्गों पर फेरे रद्द होने जैसी समस्याएं सामने आती हैं। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में बसों की कमी का असर यात्रियों पर पड़ रहा है। नई बसों के आने से इन समस्याओं में कमी आने की उम्मीद है।
5,000 बसों की खरीद की यह योजना एमएसआरटीसी द्वारा अपने पुराने बेड़े को चरणबद्ध तरीके से बदलने की व्यापक योजना का हिस्सा है। निविदा दस्तावेज के अनुसार प्रस्तावित बसें 11 मीटर लंबी, बीएस-6 मानक वाली डीजल बसें होंगी और इनके साथ सात वर्ष का व्यापक रखरखाव अनुबंध भी शामिल है।
इससे पहले महामंडल ने कुल 8,000 नई बसों को बेड़े में शामिल करने का लक्ष्य रखा था। इनमें से 3,000 बसों की निविदा प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है, जबकि अब 5,000 बसों की प्रक्रिया भी पूरी होने से बेड़े के विस्तार का रास्ता साफ हुआ है।
परिवहन विभाग का मानना है कि नई बसों के आने से यात्रियों को अधिक नियमित सेवाएं मिलेंगी, खराबी के कारण होने वाले व्यवधान कम होंगे और मांग के अनुसार अतिरिक्त बस फेरे शुरू करना भी संभव होगा। विशेष रूप से ग्रामीण महाराष्ट्र में ‘लालपरी’ बसें सार्वजनिक परिवहन की महत्वपूर्ण कड़ी हैं।
नई बसों के शामिल होने के साथ एमएसआरटीसी का लक्ष्य पुराने वाहनों पर निर्भरता कम कर सुरक्षित, विश्वसनीय और बेहतर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था तैयार करना है।


