मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई पुलिस की साइबर पुलिस ने कंबोडिया में बैठे साइबर अपराधियों को सिम कार्ड और वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) उपलब्ध कराने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी इन संसाधनों का इस्तेमाल भारतीयों को निशाना बनाकर निवेश के नाम पर साइबर ठगी करने वाले गिरोहों के लिए करते थे।


पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में दिल्ली निवासी प्रमोद कुमार (34) तथा उत्तर प्रदेश के धर्मेंद्र गुप्ता (43) और राजीव गुप्ता (51) शामिल हैं। प्रमोद कुमार कॉलेज ड्रॉपआउट है और उस पर बड़ी संख्या में सिम कार्ड का इस्तेमाल कर व्हाट्सऐप अकाउंट सक्रिय करने तथा उनके ओटीपी कंबोडिया स्थित साइबर ठगों तक पहुंचाने का आरोप है।
जांच में सामने आया कि कुमार ने कथित तौर पर करीब 6,000 सिम कार्ड का इस्तेमाल किया। वह छह अंकों वाले ओटीपी तैयार कर उन्हें साइबर अपराधियों को बेचता था। पुलिस के मुताबिक, एक ओटीपी के लिए वह 2,500 से 12,500 रुपये तक लेता था। भुगतान क्रिप्टोकरेंसी में किया जाता था, जिसे बाद में निजी मनी एक्सचेंज के जरिए नकदी में बदला जाता था या डिजिटल वॉलेट में ट्रांसफर किया जाता था।
पुलिस ने बताया कि धर्मेंद्र गुप्ता और राजीव गुप्ता कथित तौर पर फर्जी सिम कार्ड उपलब्ध कराते थे। इन सिम कार्ड की मदद से कुमार व्हाट्सऐप अकाउंट बनाता और उनके सक्रियण के लिए मिलने वाले ओटीपी कंबोडिया में बैठे हैंडलरों को भेजता था। पुलिस ने इस पूरी प्रक्रिया को ‘ओटीपी फार्मिंग’ बताया है।
मामले की जांच उस समय शुरू हुई, जब अप्रैल में अंधेरी निवासी 68 वर्षीय व्यक्ति से 22.3 लाख रुपये की शेयर निवेश ठगी हुई। पीड़ित को टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ा गया था और बाद में व्हाट्सऐप के जरिए एक प्रतिष्ठित निवेश कंपनी के प्रतिनिधि बनकर आरोपियों ने संपर्क किया। उसे शेयर बाजार में भारी मुनाफे का लालच दिया गया। निवेश और कथित मुनाफा वापस निकालने की कोशिश करने पर उससे और रकम मांगी गई।
तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची। दिल्ली स्थित प्रमोद कुमार के घर से 100 मोबाइल फोन, 669 सिम कार्ड, एक कंप्यूटर, दो चेकबुक और एक पासबुक बरामद की गई है।
जांच के दौरान पुलिस को कुमार के मोबाइल फोन में एक चीनी भाषा में रखा गया व्हाट्सऐप डिस्प्ले नाम भी मिला, जिसके जरिए सिम और व्हाट्सऐप नंबर ओटीपी के साथ बेचने का कथित विज्ञापन किया जाता था। साइबर अपराधी इसी माध्यम से उससे संपर्क कर ऑर्डर देते थे।
पुलिस के अनुसार, ओटीपी या सिम फार्मिंग में बड़ी संख्या में सिम कार्ड का इस्तेमाल कर हजारों ओटीपी हासिल किए जाते हैं। इससे ऑनलाइन सत्यापन प्रक्रिया को दरकिनार कर फर्जी डिजिटल पहचान और साइबर अपराधों को अंजाम देने में मदद मिल सकती है। पुलिस अब आरोपियों के नेटवर्क, कंबोडिया में मौजूद हैंडलरों और इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
एक साइबर पुलिस अधिकारी के मुताबिक, जून में दिल्ली में प्रवर्तन निदेशालय की जांच में कंबोडिया से संचालित करीब 36,000 सक्रिय भारतीय सिम कार्ड का पता चला था। इनमें लगभग 5,300 सिम कार्ड ऐसे साइबर ठगी के मामलों से जुड़े पाए गए थे, जिनमें देशभर में करीब 100 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का उल्लेख था।


