मुंबई वार्ता संवाददाता

गणेशोत्सव के बाद मुंबई में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने विसर्जित गणेश प्रतिमाओं और उनसे जुड़े मलबे की बड़े पैमाने पर सफाई अभियान चलाया। 16 से 27 सितंबर के बीच बीएमसी ने कुल 2,754.9 टन प्रतिमा सामग्री और अन्य विसर्जित सामग्री को निकालकर निर्धारित स्थान तक पहुंचाया।


बीएमसी के अनुसार, 26 सितंबर यानी अनंत चतुर्दशी के दिन एक ही दिन में सबसे अधिक 510.9 टन सामग्री हटाई गई। इसके लिए 131 वाहनों की यात्राएं की गईं। वार्ड के हिसाब से के-पश्चिम वार्ड, जिसमें अंधेरी पश्चिम, जुहू और वर्सोवा क्षेत्र आते हैं, सबसे आगे रहा। यहां से 314.8 टन सामग्री एकत्र की गई। इसके बाद एस वार्ड से 253.6 टन और डी वार्ड से 249.4 टन सामग्री हटाई गई।


बीएमसी के अधिकारियों के मुताबिक, प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनी गणेश प्रतिमाएं पानी में प्राकृतिक रूप से आसानी से नहीं घुलतीं। विसर्जन के बाद यदि पीओपी का मलबा कृत्रिम विसर्जन तालाबों या प्राकृतिक जलस्रोतों में पड़ा रहता है, तो इससे जल गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। साथ ही कृत्रिम तालाबों के दोबारा इस्तेमाल में भी परेशानी आती है और मलबा समुद्र तटों तथा अन्य जलस्रोतों में जमा हो सकता है। इसी वजह से विसर्जन के बाद सामग्री को समय पर हटाना जरूरी था।
बीएमसी के ठोस कचरा प्रबंधन विभाग के उपायुक्त किरण दिघावकर ने बताया कि एकत्र की गई सामग्री को विशेष रूप से तैयार किए गए मुलुंड स्थित अस्थायी भंडारण केंद्र में पहुंचाया गया है। प्रत्येक वाहन का वजन वेटब्रिज पर दर्ज किया गया। इसके अलावा वार्डवार रिकॉर्ड, तस्वीरें और दैनिक प्रगति रिपोर्ट भी तैयार की गईं।
बीएमसी अब इस सामग्री के वैज्ञानिक पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए महानगरपालिका ने पर्यावरण के अनुकूल तकनीक उपलब्ध कराने वाली एजेंसियों से रुचि पत्र आमंत्रित किए हैं। पूरी कार्रवाई के दौरान धार्मिक भावनाओं, पर्यावरणीय जिम्मेदारियों और कानूनी निर्देशों का ध्यान रखने की बात बीएमसी ने कही है।
यह अभियान बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देशों और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के अनुरूप चलाया गया। बीएमसी ने विसर्जन के बाद प्रतिमाओं के संग्रह, परिवहन, दस्तावेजीकरण और अस्थायी भंडारण के लिए शहरभर में मानक संचालन प्रक्रिया भी लागू की थी।
पर्यावरण कार्यकर्ता रोहित जोशी ने दावा किया है कि कुछ छोटे आकार की प्रतिमाओं के भी प्राकृतिक जलस्रोतों में विसर्जित किए जाने के मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उपलब्ध तस्वीरों के आधार पर वह अदालत को जानकारी देंगे।


