■ बारामती में अजित पवार की राजनीतिक विरासत को मिली मजबूती, बागी पैनल भी खाता नहीं खोल सका।
मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के पैनल ने पुणे जिले की प्रतिष्ठित सोमेश्वर सहकारी चीनी मिल के चुनाव में शानदार जीत दर्ज की है। सुनेत्रा पवार समर्थित पैनल ने चुनाव की सभी 21 सीटों पर कब्जा जमाते हुए शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के समर्थित पैनल और बागी उम्मीदवारों के समूह को करारी शिकस्त दी। चुनाव परिणाम मंगलवार, 13 अक्टूबर को घोषित किए गए।


यह चुनाव दिवंगत वरिष्ठ नेता अजित पवार के निधन के बाद सहकारिता क्षेत्र में पहला बड़ा राजनीतिक मुकाबला माना जा रहा था। इसलिए इसे सुनेत्रा पवार के नेतृत्व और बारामती क्षेत्र में अजित पवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की उनकी क्षमता की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा था। सभी 21 सीटों पर जीत के साथ सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाले गुट ने अपनी संगठनात्मक ताकत का प्रदर्शन किया है।
सोमेश्वर सहकारी चीनी मिल बारामती क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण संस्था है। इस क्षेत्र में पवार परिवार का लंबे समय से राजनीतिक प्रभाव रहा है। चीनी मिलों और सहकारी संस्थाओं का महाराष्ट्र की ग्रामीण राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान है, क्योंकि इनका संबंध किसानों, गन्ना उत्पादकों और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों से जुड़ा हुआ है।
■ 84.25 प्रतिशत मतदान, 27,625 मतदाताओं में से 23,393 ने डाले वोट
सोमेश्वर सहकारी चीनी मिल के चुनाव में कुल 27,625 सदस्य मतदाता थे। इनमें से 23,393 सदस्यों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। इस तरह मतदान का कुल प्रतिशत 84.25 रहा। मिल के संचालक मंडल की 21 सीटों के लिए तीन पैनल के कुल 83 उम्मीदवार मैदान में थे। सुनेत्रा पवार समर्थित पैनल के उम्मीदवारों को 12,000 से अधिक वोट मिले, जबकि बागी पैनल के उम्मीदवारों को औसतन 5,500 से 6,000 वोट और शरद पवार समर्थित पैनल के उम्मीदवारों को औसतन लगभग 2,500 वोट मिले।
■ पुरुषोत्तम जगताप की बगावत भी नहीं आई काम
इस चुनाव में चीनी मिल के तत्कालीन अध्यक्ष पुरुषोत्तम जगताप की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण रही। जगताप करीब 13 वर्षों तक मिल के अध्यक्ष रहे थे और लंबे समय तक अजित पवार के करीबी सहयोगी माने जाते थे। हालांकि, उन्होंने सुनेत्रा पवार समर्थित पैनल से अलग होकर अपना स्वतंत्र पैनल मैदान में उतारा। उनके पैनल को भारतीय जनता पार्टी का समर्थन मिलने की खबरें भी सामने आई थीं।जगताप को मुरुम-वाल्हा निर्वाचन क्षेत्र में सुनेत्रा पवार समर्थित उम्मीदवार विक्रम भोसले ने हराया। भोसले को 13,854 वोट मिले, जबकि जगताप को 7,364 वोट ही प्राप्त हुए। इस प्रकार भोसले ने 6,490 मतों के अंतर से जीत हासिल की। यह परिणाम बागी गुट के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
■ शरद पवार ने भी किया था प्रचार
शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा (शरदचंद्र पवार) ने इस चुनाव में युगेंद्र पवार के नेतृत्व में अपना पैनल उतारा था। युगेंद्र पवार, अजित पवार के छोटे भाई के बेटे हैं। शरद पवार ने चुनाव प्रचार के दौरान चीनी मिल के कार्यक्षेत्र में आने वाले सूखा प्रभावित इलाकों का दौरा भी किया था। इसके बावजूद उनके समर्थित पैनल को एक भी सीट नहीं मिली।दूसरी ओर, सुनेत्रा पवार के साथ उनके बेटे जय पवार ने भी प्रचार अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने मिल के सदस्य किसानों तक पहुंचकर अपने पैनल के पक्ष में समर्थन जुटाने का प्रयास किया।
■ अजित पवार के काम को किसानों का समर्थन बताया
चुनाव में जीत के बाद सुनेत्रा पवार ने इसे अजित पवार के वर्षों के काम का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के किसानों ने अजित दादा के प्रयासों का सम्मान करते हुए उनके पैनल को समर्थन दिया है। उन्होंने जीत को अजित पवार के कार्यों को समर्पित किया।राजनीतिक दृष्टि से यह जीत सुनेत्रा पवार के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे बारामती के सहकारिता क्षेत्र में उनके नेतृत्व को मजबूती मिली है। साथ ही, अजित पवार के करीबी रहे नेताओं की चुनौती और शरद पवार समर्थित पैनल की हार ने महाराष्ट्र की सहकारी राजनीति में दोनों राष्ट्रवादी गुटों के बीच जारी प्रतिस्पर्धा को भी रेखांकित किया है।


