श्रीश उपाध्याय / मुंबई वार्ता

मुंबई के आजाद मैदान में शुक्रवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से आयोजित ‘तिरंगा लहरा दो’ आंदोलन अपेक्षित भीड़ नहीं जुटा पाने के कारण फ्लॉप शो बन गया। आंदोलन के लिए अनुमति मिलने के बावजूद दोपहर 1:30 बजे तक मैदान में महज 12 से 14 लोग ही जमा हो सके। इसे लेकर राजनीतिक हलकों में सीजेपी की जनसमर्थन जुटाने की क्षमता पर सवाल उठने लगे हैं।


जानकारी के अनुसार, सीजेपी ने मुंबई के आजाद मैदान में ‘तिरंगा लहरा दो’ आंदोलन आयोजित करने के लिए पुलिस से अनुमति मांगी थी। मुंबई पुलिस ने इस कार्यक्रम को मंजूरी देते हुए सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक आंदोलन करने की अनुमति दी थी। हालांकि, कार्यक्रम के निर्धारित समय के दौरान प्रदर्शनकारियों की संख्या बेहद कम दिखाई दी।


दोपहर 1:30 बजे तक केवल 12 से 14 लोगों के पहुंचने से आंदोलन में अपेक्षित उत्साह नजर नहीं आया। इतनी बड़ी आबादी वाले मुंबई शहर में एक राजनीतिक आंदोलन के लिए इतने कम लोगों का जुटना आयोजकों के लिए असहज स्थिति माना जा रहा है।
तिलचट्टॉ प्रमुख अभिजीत दीपके ने कम भीड़ के पीछे, अनुमति मिलने में हुई देरी को कारण बताया। उनका कहना था कि अंतिम समय में अनुमति मिलने के कारण लोगों को जुटाने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल सका। हालांकि, इस स्पष्टीकरण के बावजूद आंदोलन में कम उपस्थिति को लेकर चर्चा जारी रही।
राजनीतिक दृष्टि से इस घटनाक्रम को विपक्षी दलों के समर्थन के सहारे अपनी ताकत प्रदर्शित करने की कोशिश के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। आलोचकों का मानना है कि किसी भी राजनीतिक संगठन की वास्तविक ताकत का आकलन उसके आंदोलन में लोगों की भागीदारी से भी किया जाता है।
आजाद मैदान में सीजेपी के इस कार्यक्रम में कम उपस्थिति ने संगठन की जनाधार संबंधी दावेदारी पर सवाल खड़े किए हैं। अब देखना होगा कि पार्टी भविष्य में अपने आंदोलनों के जरिए अधिक लोगों को जोड़ने और मुंबई में अपनी राजनीतिक उपस्थिति मजबूत करने के लिए क्या रणनीति अपनाती है?


