मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई के पूर्व उपमहापौर और शिवसेना नेता बाबूभाई भवानजी ने भारत सहित दुनिया की सभी विमानन कंपनियों से मुस्लिम पायलटों की भर्ती नहीं करने की मांग की है। एक प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने दावा किया कि शिक्षित मुस्लिम भी कट्टरपंथियों के बहकावे में आ सकते हैं और इसलिए उन्हें पायलट जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए।


भवानजी ने आशंका जताई कि मुस्लिम पायलटों के विमान उड़ाने से यात्रियों की जान खतरे में पड़ सकती है।भवानजी के इस बयान में धर्म के आधार पर पूरे समुदाय के पायलटों की भर्ती पर रोक लगाने की मांग की गई है। हालांकि, किसी व्यक्ति की धार्मिक पहचान अपने आप में उसके पेशेवर आचरण या सुरक्षा संबंधी जोखिम का प्रमाण नहीं है। इस तरह की मांग से विमानन क्षेत्र में समान अवसर, रोजगार में भेदभाव और सुरक्षा के आकलन के मानकों को लेकर सवाल उठते हैं।
■ इजरायल के प्रतिबंधों का दिया हवाला
अपने बयान के समर्थन में भवानजी ने इजरायल जाने वाली उड़ानों में कुछ देशों के नागरिकों को पायलट या केबिन क्रू के रूप में तैनात करने पर लगाए गए कथित प्रतिबंधों का हवाला दिया। प्रेस नोट के मुताबिक, फ्रांस की प्रमुख विमानन कंपनी एयर फ्रांस ने पुष्टि की है कि वह इजरायल के अधिकारियों की ओर से निर्धारित प्रवेश और सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन कर रही है।
प्रेस नोट में मीडिया रिपोर्टों के हवाले से दावा किया गया है कि इन नियमों के तहत उन देशों के नागरिकों को इजरायल जाने वाली या उसके हवाई क्षेत्र से गुजरने वाली उड़ानों में ड्यूटी करने से रोका जा सकता है, जिनके इजरायल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं। इस नीति से पाकिस्तान सहित कई देशों के नागरिक प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, इन प्रतिबंधों का सटीक दायरा और विभिन्न विमानन कंपनियों द्वारा इन्हें लागू करने की स्थिति स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं है।
अल जजीरा और फ्रांसीसी खोजी पत्रकारिता संस्था मे दिया पार्ट की रिपोर्टों का हवाला देते हुए प्रेस नोट में अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, ईरान, ओमान, सऊदी अरब और नाइजर जैसे देशों का भी उल्लेख किया गया है। एयर फ्रांस के अनुसार, जिन देशों में वह उड़ानें संचालित करती है, वहां के अधिकारियों द्वारा यात्रियों और कर्मचारियों के लिए निर्धारित प्रवेश नियमों का पालन करना उसकी जिम्मेदारी है।
■ फ्लाईदुबई की उड़ान में सह-पायलट पर हमले का दावा
प्रेस नोट में 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान संख्या एफजेड-1073 में हुई कथित घटना का भी उल्लेख है। इसमें दावा किया गया है कि ओमान के सह-पायलट ने मुख्य पायलट कैप्टन स्मित माछर पर चाकू से हमला किया, जिसके बाद विमान में गंभीर स्थिति पैदा हो गई।दावे के मुताबिक, विमान लगभग 34,000 फीट की ऊंचाई पर था और हमले के बाद तेजी से नीचे गिरने लगा। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद भारतीय मूल के कैप्टन स्मित माछर ने स्थिति संभालने का प्रयास किया। इसके बाद हमलावर सह-पायलट को काबू में किया गया और विमान को सऊदी अरब के तबूक हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतार लिया गया।
प्रेस नोट में घायल पायलट के अस्पताल में उपचाराधीन होने की बात भी कही गई है। इस घटना के विवरण और इससे संबंधित सुरक्षा निर्देशों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।### यूनाइटेड एयरलाइंस के नियमों का भी उल्लेखप्रेस नोट के अनुसार, अमेरिका की यूनाइटेड एयरलाइंस ने भी अपने पायलटों और केबिन क्रू को इजरायल आने-जाने वाली उड़ानों पर लागू राष्ट्रीयता संबंधी नियमों की जानकारी दी है। विमानन समाचार वेबसाइट सीएच-एविएशन के हवाले से दावा किया गया है कि कंपनी के आंतरिक शेड्यूलिंग ज्ञापन में 29 देशों का उल्लेख है, जिनके नागरिकों को तेल अवीव जाने वाली या वहां से आने वाली उड़ानों में ड्यूटी करने से रोका जा सकता है।बताई गई सूची में अफगानिस्तान, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, ईरान, इराक, कुवैत, लेबनान, मलेशिया, मालदीव, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, सोमालिया, सूडान, सीरिया, ट्यूनीशिया और यमन सहित अन्य देश शामिल हैं।
■ राष्ट्रीय सुरक्षा और रोजगार में समानता पर सवाल
राष्ट्रीयता के आधार पर कर्मचारियों को किसी खास मार्ग की उड़ानों से हटाने की नीति को लेकर रोजगार में समानता और संभावित भेदभाव से जुड़े सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का तर्क है कि किसी कर्मचारी की राष्ट्रीयता के आधार पर उसकी पेशेवर जिम्मेदारियों को सीमित करना विवादास्पद हो सकता है, खासकर तब जब उसके व्यक्तिगत आचरण या सुरक्षा संबंधी जोखिम का अलग से आकलन नहीं किया गया हो।यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी विशेष देश के नागरिकों पर लगाया गया कथित प्रतिबंध और किसी धर्म के सभी लोगों को नौकरी से बाहर रखने की मांग दो अलग-अलग विषय हैं। राष्ट्रीयता, राजनयिक संबंधों और सुरक्षा संबंधी नियमों को किसी पूरे धार्मिक समुदाय की पेशेवर योग्यता या विश्वसनीयता का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
फिलहाल, प्रेस नोट में उल्लिखित प्रतिबंधों के वास्तविक दायरे और उन्हें लागू करने वाली विमानन कंपनियों की संख्या को लेकर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस मामले ने राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंताओं और कर्मचारियों के समान अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर बहस को सामने ला दिया है।


