मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र में मानसून की कमजोर बारिश और भूजल स्तर में गिरावट के कारण जलसंकट गहराता जा रहा है। राज्य के हजारों गांवों में आने वाले महीनों में पेयजल की समस्या गंभीर होने की आशंका है। पानी की कमी को लेकर जलापूर्ति विभाग ने चिंता जताई है और आशंका है कि आगामी गर्मी में पानी के टैंकरों की मांग रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकती है।राज्य में पानी की मौजूदा स्थिति भी चिंताजनक है। 14 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र में एक महीने के भीतर पानी के टैंकरों की संख्या में 86.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं, टैंकर से पानी मंगाने वाले गांवों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है।


■ एक महीने में 411 से बढ़कर 768 हुए टैंकर
राज्य के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 13 सितंबर को महाराष्ट्र में 411 टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जा रही थी। यह संख्या बढ़कर 768 हो गई है। इसी अवधि में टैंकर से पानी पाने वाले गांवों की संख्या 362 से बढ़कर 635 हो गई। इस तरह टैंकरों की तैनाती में 86.6 प्रतिशत और प्रभावित गांवों की संख्या में 75 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।जिलावार स्थिति देखें तो छत्रपति संभाजीनगर में 169, बीड में 166, अहिल्यानगर में 161, सोलापुर में 123 और जालना में 29 टैंकर तैनात हैं। इन जिलों में पेयजल की उपलब्धता बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
■ मराठवाड़ा और अन्य क्षेत्रों में बढ़ी चिंता
कम बारिश और भूजल स्तर में गिरावट के कारण ग्रामीण इलाकों में कुओं, बोरवेल और अन्य जलस्रोतों पर दबाव बढ़ रहा है। जिन क्षेत्रों में अभी कुओं से पानी उपलब्ध है, वहां भी आने वाले समय में जलस्रोत सूखने पर टैंकरों की जरूरत पड़ सकती है।जलापूर्ति एवं स्वच्छता मंत्री गुलाबराव पाटील ने कहा है कि लोगों की जरूरत के अनुसार सरकार टैंकर उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। जिला प्रशासन जरूरत का आकलन करता है, जबकि टैंकर किराये पर लेने के लिए राज्य का विभाग धन उपलब्ध कराता है।
■ वर्ष 2027 की गर्मियों में बढ़ सकती है चुनौती
विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, टैंकरों की मांग हर सप्ताह बढ़ रही है। आशंका जताई गई है कि मई-जून 2027 तक टैंकरों की जरूरत काफी बढ़ सकती है और स्थिति 2016 तथा 2019 के जलसंकट जैसी हो सकती है। फिलहाल 20 जिलों में टैंकरों की तैनाती नहीं हुई है, लेकिन वहां के जलस्रोत सूखने पर स्थिति बदल सकती है।महाराष्ट्र सरकार ने पानी की कमी को देखते हुए 16 अक्टूबर से स्थानीय निकायों को कम से कम 10 प्रतिशत पानी की कटौती लागू करने का निर्देश भी दिया है। साथ ही पानी की बर्बादी रोकने, पाइपलाइन के रिसाव को ठीक करने और बागवानी, निर्माण तथा सफाई जैसे कामों में उपचारित अपशिष्ट जल का इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
कुल मिलाकर, कमजोर मानसून के कारण महाराष्ट्र में पेयजल संकट गंभीर होता दिखाई दे रहा है। यदि आगामी महीनों में जलस्रोतों का स्तर नहीं सुधरा, तो ग्रामीण क्षेत्रों में टैंकरों पर निर्भरता और बढ़ सकती है। इससे राज्य के सामने पेयजल आपूर्ति और जल प्रबंधन की बड़ी चुनौती खड़ी होने की आशंका है।


