मुंबई वार्ता संवाददाता

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को भारत को धर्मनिरपेक्ष देश बताते हुए अभिनेत्री दीया मिर्जा के खिलाफ राजनेताओं की ओर से की गई बयानबाजी पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) को निर्देश दिया कि वह अभिनेत्री का हटाया गया जागरूकता वीडियो दोबारा अपलोड करे, जिसमें उन्होंने लोगों से पर्यावरण के अनुकूल और पटाखामुक्त दिवाली मनाने की अपील की थी।


अदालत ने नेताओं की ओर से अभिनेत्री के रुख को लेकर की गई टिप्पणियों पर अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि देश का संविधान धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत पर आधारित है। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के लिए की गई अपील को राजनीतिक या धार्मिक रंग देना उचित नहीं है।
दरअसल, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने दिवाली के अवसर पर जनजागरूकता अभियान के तहत अभिनेत्री दीया मिर्जा का एक वीडियो तैयार किया था। इस वीडियो में 44 वर्षीय अभिनेत्री ने मुंबईकरों से सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे नहीं फोड़ने की अपील की थी। उन्होंने अपनी अपील के समर्थन में बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश का भी हवाला दिया था।वीडियो में दीया मिर्जा ने लोगों से पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने और प्रदूषण कम करने में सहयोग करने का आग्रह किया था। हालांकि, वीडियो को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया और कुछ नेताओं ने अभिनेत्री के रुख पर आपत्ति जताते हुए उनके खिलाफ बयानबाजी की।
विवाद बढ़ने के बाद बीएमसी ने अपने मंच से यह वीडियो हटा दिया था। इस घटनाक्रम पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए वीडियो को दोबारा अपलोड करने का निर्देश दिया।अदालत की इस टिप्पणी को पर्यावरण संरक्षण, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


