अपहरण और फिरौती के मामले में मुंबई पुलिस के चार हवलदार गिरफ्तार और ज़मानत पर रिहा।

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श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

मुंबई पुलिस विभाग के 4 हवलदारों को डी एन नगर पुलिस ने अपहरण और फिरौती के आरोप में गिरफ्तार किया था जिन्हें अदालत से ज़मानत पर रिहा कर दिया गया है।डी एन नगर पुलिस थाने में 26 जून को एक एफआईआर क्रमांक दर्ज 761/2025 दर्ज किया गया।

शिकायतकर्ता मोहम्मद आरिफ फैजान खान के अनुसार वह एस वी रोड पर भारत पेट्रोल पंप के बगल में स्थित गोल्डन पान-बीड़ी शॉप किराये पर लेकर चलाता है। 24 जून शाम 4 के करीब चार लोग उसकी दुकान पर आए। उन्होंने स्वयं को एफ डी ए पुलिस विभाग कर्मी बताया और आरिफ को जबरन अपनी कार में बिठाकर कॉटन ग्रीन की ओर ले गए। चारों ने आरिफ के खिलाफ गुटखा बेचने का आरोप लगाकर उसे गिरफ्तार करने की धमकी दी और छोड़ने के बदले रू 3 लाख की फिरौती मांगी।

आरिफ ने घबराकर अपने मित्र से रू 30 हज़ार मोबाइल पर मंगवाया और चारों अपहरणकर्ताओं में से एक के मोबाइल पर रू 40,000 ट्रांसफर किया। फिरौती की रकम लेकर चारों ने आरिफ को छोड़ दिया। आरिफ ने 26 जून को डी एन नगर पुलिस में मामला दर्ज कराया जिसमें 4 अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया।

इस मामले के बारे में डी एन नगर पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक राजेंद्र मच्छीद्र से पूछताछ करने पर उन्होने कुछ भी बताने से साफ़ इंकार कर दिया।पुलिस सूत्रों से एफआईआर नंबर तो मिला लेकिन अन्य जानकारी नहीं मिल रही थी।जोन-9 के पुलिस उपायुक्त दीक्षित गेडाम से भी जानकारी मांगी गई लेकिन उनसे भी कोई जानकारी नहीं मिली।

पुलिस विभाग का हर वरिष्ठ या कनिष्ठ अधिकारी इस मामले पर बोलने से कतराता रहा। शिकायतकर्ता आरिफ ने भी बिना पुलिस अधिकारियों से बात किए कुछ भी कहने से मना कर दिया।

पुलिस सूत्रों के अनुसार चारों आरोपी पुलिस हवलदार है जो कि एल ए विभाग में कार्यरत हैं। इनमें से एक हेमंत कापसे पहले भी अवैध कामों में लिप्तता के कारण सस्पेंड किया जा चुका है।

मुंबई वार्ता संवाददाता ने मामले की गहराई से छानबीन की तो सूत्रों द्वारा मालूम हुआ कि गिरफ्तार आरोपी आरिफ अवैध रूप से गुटखा बेचने के कार्य में लिप्त है। चारों हवलदार इससे पहले भी गुटखा विक्रेताओ का अपहरण कर फिरौती वसूले चुके हैं। इस मामले में शिकायतकर्ता आरिफ को एक स्थानीय पुलिस अधिकारी का संरक्षण प्राप्त होने के कारण पुलिस ने आनन-फानन में मामला दर्ज कर लिया। लेकिन मामले में पुलिसकर्मियों की संलिप्तता के कारण पुलिस ने मामला रफा-दफा कर दिया और इस मामले संबंधी प्रेस विज्ञप्ति तक पत्रकारों को नहीं दी गई।

अब सवाल यह उठता है कि बार बार अपहरण और फिरौती कर चुके इन चारों पुलिस वालों को क्या पुलिस आयुक्त देवेन भारती विभाग से बाहर का रास्ता दिखाएंगे ? या पुलिस के प्रश्रय में ये चारों हवलदार इसी तरह कानून की धज्जियाँ उड़ाते रहेंगे ?

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