मुंबई वार्ता संवाददाता

एक मामले की सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा है कि महाराष्ट्र का काला जादू कानून केवल हानिकारक प्रथाओं को रोकने के लिए बनाया गया है, लेकिन यह वैध धार्मिक परंपराओं पर लागू नहीं होता।


पुणे के रहने वाले रोहन कुलकर्णी ने 2014 में शिकायत दर्ज करवाई थी कि रामेश मोडक और उनके सहयोगी नरेंद्र पाटिल ने कार्यशालाओं के जरिए धोखाधड़ी की। उन्होंने दावा किया कि रामेश मोडक काला जादू और अमानवीय अनुष्ठानों को बढ़ावा देते थे। रोहन कुलकर्णी के अनुसार, उन्होंने 2012 में एक कार्यशाला में हिस्सा लिया, जहां रामेश मोडक ने अलौकिक शक्तियों का दावा किया। इसके बाद रोहन कुलकर्णी गुजरात के नवसारी गए लेकिन रामेश मोडक से मुलाकात नहीं हो पाई।2013 में उन्होंने पुणे में एक और कार्यशाला में हिस्सा लिया, जहां रामेश मोडक ने कथित रूप से संवाद किया। वहां एक सीडी भी चलाई गई, जिसे आशीर्वाद प्राप्त बताया गया और 250 रुपये में बेचा गया। बाद में रोहन कुलकर्णी ने 45 दिन का ध्यान कोर्स किया, जिससे उन्हें मानसिक और शारीरिक परेशानी होने लगी।
2020 में निचली अदालत ने कहा कि रोहन कुलकर्णी की शिकायत में काला जादू कानून के तहत कोई अपराध नहीं बनता, इसलिए रामेश मोडक को बरी कर दिया गया। हाई कोर्ट ने भी इस फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया और कहा कि रामेश मोडक ने स्वयं कोई कार्यशाला आयोजित नहीं की थी, इसलिए उन पर मुकदमा नहीं चल सकता।


