मुंबई वार्ता/सतीश सोनी

केंद्रीय चुनाव आयोग ने एक बड़ा फैसला लेते हुए देश में पंजीकृत लेकिन मान्यता प्राप्त नहीं, ३३४ राजनीतिक दलों को मतदाता सूची से बाहर कर दिया है। इनमें महाराष्ट्र के ९ दल भी शामिल हैं।


चुनाव आयोग ने यह कार्रवाई उन दलों के खिलाफ की है जिन्होंने लगातार छह वर्षों तक किसी भी चुनावी प्रक्रिया में भाग नहीं लिया है और जिनका पंजीकृत पता मौजूद नहीं है।चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, १९५१ (लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम) की धारा २९ए के अनुसार, किसी भी राजनीतिक दल को अपने पंजीकरण के पाँच वर्षों में कम से कम एक बार चुनाव लड़ना आवश्यक है। यदि कोई दल लगातार छह वर्षों तक किसी भी चुनाव में भाग नहीं लेता है, तो उसे आयोग की सूची से हटाया जा सकता है।


आयोग ने जब इन ३३४ दलों की चुनावी भागीदारी और पंजीकृत पते की जाँच की, तो पाया गया कि वे सक्रिय नहीं थे। इसलिए, उन्हें सूची से हटाए गए दलों के रूप में चिह्नित किया गया है।सूची से हटाए गए दलों को अब जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और अन्य संबंधित कानूनों के अनुसार कोई भी चुनावी लाभ नहीं मिलेगा। इसमें चुनाव चिह्न का उपयोग, आयकर में छूट, प्रचार के लिए विशेष सुविधाएँ शामिल हैं।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस निर्णय से प्रभावित कोई भी दल ३० दिनों के भीतर इस निर्णय के विरुद्ध अपील कर सकता है। इस निर्णय को चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और सक्रिय राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।वर्तमान में, देश में छह राष्ट्रीय दल और ६७ क्षेत्रीय दल सक्रिय हैं।
महाराष्ट्र में (१) आवामी विकास पार्टी (२) बहुजन रयत पार्टी (3) भारतीय संग्राम परिषद (४) भारतीय मिलन पार्टी (५) नवभारत डेमोक्रेटिक पार्टी (६) नवबहुजन समाज परिवर्तन पार्टी (७) जन रक्षक दल (८) भारतीय लोक पार्टी (९) युवा शक्ति संगठन की मान्यता रद्द कर दी गई है।



1000 से कम वोट पाने वालों का भी निरस्त करना चाहिए