मुंबई वार्ता संवाददाता

देशभर में फैले साइबर धोखाधड़ी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मुंबई एयरपोर्ट से एक वकील को गिरफ्तार किया है। इस गिरफ्तारी के बाद मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों की कुल संख्या बढ़कर सात हो गई है। जांच एजेंसी इस मामले में कथित वित्तीय लेन-देन, साइबर धोखाधड़ी से अर्जित धन और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।


■ दिल्ली जाते समय एयरपोर्ट पर पकड़ा गया आरोपी
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, ईडी की पणजी इकाई की टीम ने आरोपी की पहचान रशेष उपाध्याय उर्फ रशेष शाह के रूप में की है। उसे छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उस समय रोका गया, जब वह दिल्ली जाने वाली उड़ान में सवार होने वाला था। इस कार्रवाई में सीमा शुल्क विभाग और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के अधिकारियों ने ईडी की मदद की।गिरफ्तारी के बाद आरोपी को गोवा के पणजी ले जाया गया, जहां धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गठित विशेष अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उसे 29 अक्टूबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया।
■ 2.60 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से शुरू हुई जांच
ईडी की जांच गोवा पुलिस द्वारा 9 जून 2025 को दर्ज प्राथमिकी के बाद शुरू हुई थी। आरोप है कि साइबर ठगों ने गोवा की एक महिला को डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर 21 मई से 2 जून 2025 के बीच अलग-अलग बैंक खातों में 2.60 करोड़ रुपये स्थानांतरित करने के लिए मजबूर किया।जांच में कथित तौर पर ऐसे नेटवर्क का पता चला, जिसमें कमोडिटी कारोबार, यात्रा सेवाओं और विदेशी मुद्रा विनिमय से जुड़ी कंपनियों के बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर अपराध से प्राप्त धन को छिपाने और इधर-उधर स्थानांतरित करने के लिए किया गया।
ईडी के अनुसार, इस नेटवर्क से जुड़े खातों के माध्यम से लगभग 28,000 करोड़ रुपये के बैंकिंग लेन-देन हुए। इसके अलावा करीब 2,900 करोड़ रुपये नकद जमा किए जाने की बात सामने आई है। एजेंसी ने इन खातों को देश के 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में दर्ज 300 से अधिक शिकायतों तथा 160 से ज्यादा प्राथमिकी से भी जुड़ा पाया है। संबंधित शिकायतों में पीड़ितों को 400 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान की सूचना है।
■ बैंक खातों को खुलवाने के लिए रिश्वत देने का आरोप
ईडी का आरोप है कि गिरफ्तार वकील इस नेटवर्क की एक महत्वपूर्ण कड़ी था। जांच एजेंसी के मुताबिक, साइबर अपराध से जुड़े बैंक खातों को शिकायतों के बाद जब फ्रीज किया जाता था, तब कथित तौर पर संबंधित अधिकारियों को रिश्वत देकर उन्हें दोबारा खुलवाने की व्यवस्था की जाती थी। इसके लिए नकदी के लेन-देन में बिचौलियों और तथाकथित ‘आंगड़िया’ नेटवर्क का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है।
एजेंसी का यह भी दावा है कि धोखाधड़ी से प्राप्त रकम को कई बैंक खातों में भेजने के बाद नकदी के रूप में निकाला जाता था और फिर भारतीय रिजर्व बैंक से लाइसेंस प्राप्त विदेशी मुद्रा विनिमय केंद्रों के माध्यम से विदेशी मुद्रा में बदला जाता था। इस पूरी प्रक्रिया के जरिए धन के वास्तविक स्रोत और लाभार्थियों की पहचान छिपाने का संदेह है। इन आरोपों की जांच अभी जारी है।
■ डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी से सावधान
डिजिटल अरेस्ट साइबर अपराध का एक तरीका है, जिसमें ठग पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसियों या अन्य सरकारी अधिकारियों का रूप धारण करके फोन अथवा वीडियो कॉल के माध्यम से लोगों को गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं। इसके बाद उन्हें कथित जांच या सत्यापन के नाम पर बड़ी रकम ऑनलाइन स्थानांतरित करने के लिए मजबूर किया जाता है।ऐसी धोखाधड़ी का शिकार होने पर तत्काल राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें या [राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल](https://cybercrime.gov.in/?utm_source=chatgpt.com) पर जानकारी दें।


