देश विरोधी ताकतों का समर्थन करने वाली कांग्रेस, उद्धव ठाकरे को सबक सिखाएं:-भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. पी. नड्‌डा की अपील

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मुंबई वार्ता

कांग्रेस पार्टी राजनीतिक लाभ के लिए राष्ट्रविरोधी, विभाजनकारी शहरी नक्सलियों के चंगुल में फंस गई है। बाला साहेब ठाकरे की प्रखर राष्ट्रवादी विचारधारा को समेटते हुए उद्धव ठाकरे ने सत्ता के लिए कांग्रेस से हाथ मिला लिया है। ऐसे उद्धव ठाकरे को मतदाता सबक सिखाएं ऐसा आव्हान भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने बुधवार को किया।

नड्डा ने इंजीनियरों, चार्टर्ड अकाउंटेंट, डॉक्टरों आदि विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवरों के साथ संवाद के दौरान यह अपील की। इस अवसर पर मालाबार हिल निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी महायुति के उम्मीदवार और कौशल विकास मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा उपस्थित थे।

नड्डा ने विस्तार से बताया कि कैसे देश में अलगाववादी ताकतों को शहरी नक्सलियों से समर्थन मिल रहा है। श्री नड्डा ने कहा कि कर्नाटक के कांग्रेस सांसद दक्षिण से केंद्र को अधिक कर देते हैं लेकिन चूंकि यह उत्तर भारत के लिए उपयोग में लिया जाता है, इसलिए दक्षिण भारत के लिए एक स्वतंत्र देश चाहने की बात करने वाली भाषा बोलते हैं तो इसकी कोई आपत्ति नहीं होती है। जेएनयू में देश विरोधी नारों को कांग्रेस की उम्मीदवारी दी जाती है, इससे पता चलता है कि कांग्रेस का देश विरोधी ताकतों को समर्थन है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की राजनीतिक संस्कृति को पूरी तरह से बदल दिया है। पिछले 10 साल में देश की राजनीति की परिभाषा कैसी बदली इसकी श्री. नड्‌डा ने विस्तारपूर्वक समीक्षा की।

उन्होंने कहा कि 10 साल पहले भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार को प्रतिष्ठा मिली थी। राजनीतिक स्वार्थ के लिए लोगों को धर्म, राज्य, भाषा के आधार पर एक-दूसरे के खिलाफ लड़ते रखा गया। प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने राजनीति को विकास, जिम्मेदारी, गरीबों की सेवा की भाषा बनाया। प्रधानमंत्री पद पर आसीन व्यक्ति ने अपने कामकाज की प्रगति पुस्तिका जनता के सामने बारंबार अवश्य रखनी ही चाहिए, नरेंद्र मोदी ने पिछले 10 वर्षों में अपने कार्यों से यह दिखाया है।

प्रधानमंत्री ने अपनी प्रगति पुस्तक के साथ-साथ नियमित रूप से लोगों को नीतियां भी प्रस्तुत कीं और बताया कि देश भविष्य में कैसे आगे बढ़ेगा। इससे देश की राजनीतिक संस्कृति को आमूलचूल रूप से बदल दिया। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ नामक एक नई राजनीतिक संस्कृति का जन्म हुआ।

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