● कानून से बड़ा कोई नहीं, जब इंदिरा गांधी और बालासाहेब ठाकरे पर कार्रवाई हो सकती है, तो मोदी पर क्यों नहीं?
● महाराष्ट्र कांग्रेस की नई कार्यकारिणी में 66% नए चेहरे, 44% ओबीसी, और 19% एससी-एसटी प्रतिनिधित्व: हर्षवर्धन सपकाल
मुंबई वार्ता संवाददाता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2020 में आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया, लेकिन इस शिकायत पर कार्रवाई करने से चुनाव आयोग ने टालमटोल की है। आयोग ने आचार संहिता के उल्लंघन को स्वीकार करते हुए केवल रेलवे प्रशासन को चेतावनी दी, परंतु मोदी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। जबकि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे पर सख्त कार्रवाई की गई थी। जब कानून से कोई ऊपर नहीं है तो फिर नरेंद्र मोदी पर कार्रवाई क्यों नहीं? यह सवाल उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने बताया कि वे इस मामले में हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
तिलक भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में अधिक जानकारी देते हुए चव्हाण ने बताया कि 28 दिसंबर 2020 को सोलापुर जिले के सांगोला विधानसभा क्षेत्र से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, तत्कालीन रेल मंत्री और कृषि मंत्री ने सांगोला से पश्चिम बंगाल के शालिमार तक चलने वाली किसान रेल की 100वीं ट्रेन का उद्घाटन किया था। उस समय महाराष्ट्र में ग्राम पंचायत चुनाव और बंगाल में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया चल रही थी।
यह कार्यक्रम राष्ट्रीय टीवी चैनलों पर प्रसारित हुआ था। कार्यक्रम के लिए चुनाव आयोग या जिला प्रशासन से कोई अनुमति नहीं ली गई थी। इस बारे में प्रफुल्ल कदम नामक कार्यकर्ता ने आयोग में शिकायत की थी, लेकिन लंबे समय तक टालमटोल के बाद केवल रेलवे प्रशासन को चेतावनी दी गई। जब कि आचार संहिता उल्लंघन स्पष्ट रूप से हुआ था, फिर भी मोदी पर कार्रवाई नहीं की गई, ऐसा चव्हाण ने कहा।शिकायतकर्ता प्रफुल्ल कदम ने सभी नियमों और कानूनों के अनुसार आचार संहिता उल्लंघन की जानकारी दी थी। चुनाव के दौरान मतदाताओं को प्रभावित करने का यह प्रयास था और आदर्श आचार संहिता का खुला उल्लंघन था, इसलिए नरेंद्र मोदी की लोकसभा सदस्यता रद्द की जाए, ऐसी मांग की गई है।
■ महाराष्ट्र कांग्रेस की नई कार्यकारिणी घोषित.
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस की नई कार्यकारिणी में 33% अनुभवी नेता और 66% नए चेहरे शामिल किए गए हैं। कार्यकारिणी में 41% ओबीसी, 19% एससी-एसटी और 33 महिलाएं शामिल हैं। इसमें सामाजिक और भौगोलिक संतुलन साधने का प्रयास किया गया है, ऐसा प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ ने कहा।
विवादित मंत्रियों को लेकर पूछे गए सवाल पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि विधानसभा में मंत्री ताश खेलते हैं और बाहर WWF की तरह लड़ते हैं। गृह राज्य मंत्री का परिवार डांस बार चलाता है, लेकिन सरकार को इसकी कोई परवाह नहीं है। इन मंत्रियों के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस लगातार सदन और सड़कों पर आंदोलन कर रही है। लेकिन सरकार की संवेदनहीनता गैंडे की चमड़ी से भी अधिक है। धनंजय मुंडे का इस्तीफा भी नैतिकता के आधार पर नहीं बल्कि विपक्ष और समाज के दबाव के कारण देना पड़ा। बाकी कलंकित मंत्रियों के भी इस्तीफे लिए जाएं, यह कांग्रेस की मांग है।
सांसद प्रणिती शिंदे के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेशाध्यक्ष सपकाल ने कहा कि उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ या सैनिकों का अपमान नहीं किया है। उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। कांग्रेस को सैनिकों के पराक्रम पर गर्व है, लेकिन भाजपा इसे भुनाने के लिए मोदी के फौजी पोशाक में होर्डिंग्स लगवाती है। भाजपा नेता ने एक महिला अधिकारी पर बेहद निम्न स्तर की टिप्पणी की थी, इसी संदर्भ में प्रणिती शिंदे का बयान था।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के मुद्दे पर पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि राहुल गांधी के सवालों का प्रधानमंत्री मोदी ने आज तक स्पष्ट उत्तर नहीं दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने 30 बार कहा कि युद्धविराम उन्होंने करवाया – तो फिर मोदी चुप क्यों हैं? ट्रंप झूठ बोल रहे हैं या मोदी – यह स्पष्ट होना चाहिए। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने शिमला समझौता रद्द किया है क्या, और संसद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा दिए गए बयान पर सरकार को सफाई देनी चाहिए।
आतंकी कसाब को लेकर उज्ज्वल निकम द्वारा दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए चव्हाण ने कहा कि कसाब को फांसी की सजा कानून और न्यायिक प्रक्रिया के तहत दी गई थी, और वह कांग्रेस सरकार के दौरान हुई थी। इसलिए निकम का बयान निरर्थक है। भाजपा ने उन्हें राज्यसभा भेजा है, इसलिए वे ऐसे बयान दे रहे हैं, ऐसा चव्हाण ने आरोप लगाया।इस पत्रकार परिषद में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल, पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण, पूर्व सांसद कुमार केतकर, वरिष्ठ प्रवक्ता अतुल लोंढे और अनंत गाडगील उपस्थित थे।


