श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

नकली प्रमाणपत्र और रिजल्ट बनाकर विद्यार्थियों को कॉलेज में एडमिशन दिलाने के मामले में गिरफ्तार क्लर्क पंडित करंके झुनझुनवाला कॉलेज नहीं अपितु हिन्दी हाई स्कूल का है. इस बात की जानकारी तिलक नगर पुलिस थाने के प्रभारी पुलिस निरीक्षक दिलीप माने ने दी है.
ज्ञात हो कि नकली स्कूल लीविंग प्रमाणपत्र और फर्जी रिजल्ट बनाकर विद्यार्थियों को कॉलेज में एडमिशन दिलाने के रैकेट का भंडाफोड़ होने पर सोमैया कॉलेज ने 50 विद्यार्थियों का एडमिशन रद्द कर दिया था. पुलिस ने इस मामले की जांच करते हुए सोमैया कॉलेज के महेंद्र पाटिल, अर्जुन राठौड़ समेत एक अन्य एडमिशन दलाल को गिरफ्तार किया था.
इन आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पुलिस ने पंडित करंके को गिरफ्तार किया. शुरुआती पूछताछ के दौरान पुलिस से पता चला था कि पंडित झुनझुनवाला कॉलेज का कर्मचारी है. इसी आधार पर कई न्यूज पेपरों समेत *मुंबई वार्ता* ने भी खबर प्रकाशित करते समय पंडित को झुनझुनवाला कॉलेज का क्लर्क बताया था. हालाकि इस मामले पर रोष प्रकट करते हुए झुनझुनवाला कॉलेज के प्रधानाध्यापक हिमांशु दावडा ने वकील विजय मिश्रा के माध्यम से *मुंबई वार्ता* को एक कानूनी नोटिस भेजा. जिसमें मात्र टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर को सही बताते हुए, कॉलेज के बारे में गलत खबर प्रकाशित किए जाने की बात कही गई है. *मुंबई वार्ता* को इस बात का खेद है कि पुलिस से मिली जानकारी के आधार पर खबर प्रकाशित की गई जिसमें क्लर्क झुनझुनवाला कॉलेज का है, इस प्रकार छपा.
इस मामले पर अधिक जानकारी के लिए तिलक नगर पुलिस थाने के प्रभारी पुलिस निरीक्षक दिलीप माने से बात करने पर उन्होंने बताया कि पकड़ा गया क्लर्क पंडित करंके ‘हिंदी हाई स्कूल’ का है.
दरअसल में हिंदी हाई स्कूल और झुनझुनवाला कॉलेज दोनों ही हिंदी विद्या प्रचार समिति द्वारा संचालित है. इसके ट्रस्टी डॉक्टर राजेंद्र सिंह है. इस जानकारी को भी पुख्ता करने के लिए डॉक्टर राजेंद्र सिंह और झुनझुनवाला कॉलेज के प्रधानाध्यापक हिमांशु से बात करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया.
ज्ञात हो कि अभी कुछ माह पहले ही झुनझुनवाला कॉलेज में एडमिशन देने के नाम डेढ़ लाख की वसूली मामले में इसी संस्थान का एक क्लर्क पकड़ा गया था. अभी एक मामला ठंडा नहीं हुआ कि दूसरे क्लर्क के पकड़े जाने की खबर से संस्था प्रशासन बौखला गया है.
ज्ञात हो कि 20 दिसम्बर को पंडित करंके पकड़ा गया था. मुंबई वार्ता में खबर 23 दिसम्बर को प्रकाशित हुई. उससे पहले प्रख्यात न्यूज पेपर लोकमत समेत कई प्रकाशनों ने झुनझुनवाला कॉलेज का क्लर्क गिरफ्तार होने की खबर प्रकाशित की थी. लोकमत अखबार की फोटो कॉपी भी डॉक्टर राजेंद्र सिंह के वॉटस एप नंबर पर भेजी गई थी. लेकिन नोटिस सिर्फ मुंबई वार्ता को भेजी गई है.
क्यों?
क्योंकि मुंबई वार्ता ने 23 दिसम्बर को प्रकाशित न्यूज में लिखा था कि जिन कॉलेज के क्लर्क फर्जी एडमिशन मामले में गिरफ्तार हुए हैं उनके ट्रस्टियों की भी जांच की जानी चाहिए. इन ट्रस्टियों की पहुंच पुलिस विभाग के आला अधिकारियों तक है. ऐसे में इस एडमिशन रैकेट की जांच पुलिस ठीक से करेगी, इस पर संदेह व्यक्त किया जा रहा है.
दरअसल में इस पूरे मामले की न्यायिक जांच, कुछ ईमानदार जजो की देखरेख में किया जाना चाहिए. तभी दूध का दूध और पानी का पानी हो सकेगा.
नोट:-
मुंबई वार्ता किसी भी कॉलेज के एडमिशन रैकेट पर इसी प्रकार से बेबाकी से लिखता रहेगा और सच को सामने लाने के लिए भ्रष्ट कॉलेज प्रशासन की करतूत उजागर करता रहेगा. फिर इस समाज की गंदगी को दूर करने के लिए जेल भी जाना पड़े तो मुंबई वार्ता जनहित में पीछे नहीं हटेगा.


