पौष माह की ‘अखुरथ’ संकष्टी चतुर्थी बुधवार को. उत्तम संयोग में होगा गणपति पूजन, दिया जाएगा चंद्र अर्घ्य

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सौरभ शांडिल्य/ मुंबई वार्ता

सनातन संस्कृति में हर महीने की दोनों चतुर्थी तिथि पर प्रथम पूज्य गणेश की पूजा की जाती है। लेकिन कृष्ण पक्ष चतुर्थी पर भगवान गणेश की उपासना का विशेष महत्व होता है। बुधवार 18 दिसंबर को पौष माह के कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी पर कई उत्तम एवं दुर्लभ संयोग बन रहे हैं जो साधकों को शुभ फल देंगे। पौष माह की चतुर्थी को पंचांग में अखुरथ नाम दिया गया है।

मान्यता है कि इस व्रत के प्रताप से सुख, धन, वैभव तो मिलता ही है साथ में हर समस्या का निवारण मिलता है। पौष माह में आने वाली संकष्टी चतुर्थी को अखुरथ संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। ज्योतिषाचार्य डॉ. अशोक मिश्र के अनुसार 18 दिसंबर को शनि और गुरु का एक साथ मार्गी होना भी दुर्लभ एवं विशेष फलदायक माना जा रहा है। इस संयोग के कारण भक्तों को मानसिक शांति, समृद्धि का लाभ मिलेगा। इस दिन चंद्रमा के साथ गणेश जी की पूजा करने से विशेष शुभ फल की प्राप्ति होगी।

पौष माह की अखुरथ संकष्टी चतुर्थी बुधवार को पड़ने से उत्तम संयोग बन रहा है, ऐसे में गणपति की पूजा का दोगुना फल प्राप्त होगा, क्योंकि ये तिथि और दिन दोनों ही बप्पा को प्रिय है। अखुरथ संकष्टी चतुर्थीपंचांग के अनुसार बुधवार 18 दिसंबर को पौष माह के कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी सुबह 10:06 बजे शुरू होगी और अगले दिन गुरुवार 19 दिसंबर को सुबह 10:02 बजे इसका समापन होगा। इस दिन चंद्रोदय रात को 08:27 बजे होगा। यह व्रत गणेश और चंद्र की पूजा के बाद अर्घ्य देकर ही संपन्न होता है।

गणेश जी की पूजा मुहूर्त सुबह 7:08 बजे सुबह 9:43 बजे तक है। सिद्धिविनायक मंदिर प्रभादेवी पौष माह की अखुरथ संकष्टी चतुर्थी को लेकर दादर पश्चिम के प्रभादेवी स्थित श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर में विशेष व्यवस्था की गई है। मंदिर के कोषाध्यक्ष आचार्य पवन त्रिपाठी ने बताया कि भक्तों की संभावित भीड़ के मद्देनजर निजी सुरक्षा रक्षकों के साथ पुलिस बल तैनात किए जाएंगे। हिंदू धर्म में किसी भी पूजा से पहले भगवान गणेश की पूजन करना शुभ होता है, ऐसे में अखुरथ संकष्टी चतुर्थी का महत्व अधिक बढ़ गया है।

सिद्धिविनायक गणपति टिटवाला टिटवाला पूर्व स्थित प्राचीन श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर में भी पौष माह की अखुरथ संकष्टी चतुर्थी को लेकर व्यवस्था चाक चौबंद की गई है। मंदिर के ट्रस्टी योगेश मार्तंड जोशी ने बताया कि इस दिन रोजाना से अधिक निजी सुरक्षा रक्षक तैनात किए जाएंगे। साथ ही स्थानीय पुलिस से भी अतिरिक्त व्यवस्था के लिए कहा गया है।

सिंदूर लेपन : पांच दिन बाद शुरू हुआ श्री सिद्धिविनायक में दर्शन दादर पश्चिम, प्रभादेवी स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर में ‘श्री’ के विग्रह में सिंदूर लेपन अनुष्ठान के चलते बुधवार 11 से रविवार 15 दिसंबर तक भक्तों के लिए गणेश दर्शन बंद कर दिया गया था। अनुष्ठान पूरा होने के बाद सोमवार से गर्भगृह में दर्शन पूर्ववत शुरू हो गया। इस दौरान पांच दिनों तक गौरी नंदन गणेश की मूर्ति में सिंदूर लेपित किया गया।

साथ ही मंदिर परिसर में स्थित हनुमान जी की मूर्ति में भी सिंदूर लेपन अनुष्ठान पूरा होने के बाद दर्शन शुरू कर दिया गया। मंदिर की कार्यकारी अधिकारी वीणा पाटिल ने बताया कि अनुष्ठान पूरा होने के बाद पुजारियों ने आईने में मूर्ति दिखाकर दर्शन प्रक्रिया शुरू हुई।

सोमवार को श्री सिद्धिविनायक गणपति बप्पा का सिन्दूर लेपन के बाद प्रथम दर्शन अत्यंत ‘शुभ’ एवं ‘पवित्र’ माना जाता है। इसके लिए मंदिर में भक्तों की भीड़ जुटी। सिंदूर का लेप बप्पा के दीप्तिमान स्वरूप को और अधिक अभिव्यंजक बनाता है।

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