मरू प्रदेश की बहुरंगी संस्कृति का संवाहक बना नेत्रकुम्भ महाजाँच शिविर।

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■ रामदेवरा में हजारों लोग हो रहे लाभान्वित।

मुंबई वार्ता/ संजय जोशी

कम दिखने ओर कमजोर नेत्र ज्योति को विधि का विधान ओर नियति मान चुके थार के मरुस्थल के बंजर परिवेश और सुदूर बसे गावों ओर ढाणियों में बिखरी अभावों से जूझती जनसंख्या को विश्व स्तरीय नेत्र जाँच सुविधाओं से जोड़ने का संवाहक बन गया है नेत्रकुम्भ।

बारहमास चिलचिलाती धूप का निडर होकर सामना करते निश्च्छल मुस्कान ओढ़े मरुप्रदेश के वासी रंग-बिरंगे परिधान व आभूषण पहनकर मरुस्थल की कठोरता को पराजित करती बांधनी ओर बाड़मेर प्रिंट में लिपटी माताएं ओर बहनें ओर अपनी मूछों को ताव देते गांवों के मिनख।

नेत्रकुम्भ के प्रारम्भ से लेकर अभी तक 1000 से भी अधिक ऐसी माताओं ओर बुजुर्गों की पहचान की गई है, जिनकी आँखों की ज्योति इलाज के अभाव में जल्द ही खत्म होने वाली थी और मरीजों को इस बारे में पता भी नहीं था। लोकदेवता बाबा रामदेव नेत्रकुम्भ 2025 , रामदेवरा के मीडिया प्रभारी विजय अग्रवाल ने बताया कि ज्यादातर ऐसे मरीजों में आँखों में लालिमा, सूजन, रेत और लोहे के टुकड़े, भीषण गर्मी और तेज हवाओं के निरंतर सम्पर्क के कारण कॉर्निया के इर्दगिर्द पैदा हुई झिल्ली ओर कार्निया के ऊपर उग आईं चमड़ी के कारण इनके नेत्रों में भीषण नुकसान चिकित्सकों द्वारा पाया गया एवं उन्हें रोग की गम्भीरता से अवगत कराया गया। इन मरीजों को तत्काल इलाज ओर दवाई उपलब्ध कराई गई है ओर आगे के इलाज के लिए आवश्यक कदम उठाए गए है।

अब तक करीब तीन हजार से अधिक लोगों का पंजीकरण किया जाकर परामर्श प्रदान किया गया है, वहीं बड़ी संख्या में लाभार्थियों को चश्मे व आवश्यकतानुसार रोगियों को दवाइयाँ प्रदान की गई। अग्रवाल ने बताया कि शिविर में दुबई से आए युवा उद्योगपति, जयपुरवासी सवाई सुथार महाजाँच शिविर की सुविधाओं का जायजा लिया।

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