● रविवार को ‘भैंसे’ पर सवार होकर करेंगी दुर्गा मां प्रस्थानइंद्र योग और सर्वार्थ सिद्धि योग में होगी कलश स्थापना
● पंचमी तिथि का लोप, 9 नहीं 8 दिन की होगी चैत्र नवरात्र10 वर्ष बाद नव संवत्सर के राजा और मंत्री बनेंगे सूर्यदेव
वरिष्ठ संवाददाता/मुंबई वार्ता
वासंतिक नवरात्र (चैत्र नवरात्र) की शुरुआत चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है, जिसका समापन नवमी तिथि पर होता है। चूंकि चैत्र नवरात्र की नवमी तिथि पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का अवतार हुआ था इसलिए इसे रामनवमी के रूप में मान्यता प्राप्त है।
इस वर्ष चैत्र नवरात्र रविवार 30 मार्च से प्रारंभ हो रही है जो रविवार 6 मार्च को पूर्ण होगी। नवरात्र के नौ दिनों में देवी के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है। प्रथम दिन इंद्र योग और सर्वार्थ सिद्धि योग में कलश स्थापना की जाएगी। इस वर्ष वासंतिक नवरात्र में पंचमी तिथि का लोप (क्षय) होने से 9 दिन की बजाय 8 दिन की नवरात्रि होगी। 30 मार्च को शुरू होने वाले चैत्र नवरात्र व हिंदू नववर्ष (नव संवत्सर) के राजा और मंत्री दोनों सूर्य ही हैं।
यह संयोग 10 साल बाद बन रहा है।ज्योतिषाचार्य डॉ. अशोक मिश्र ने बताया कि देवी पुराण के अनुसार नवरात्र मां दुर्गा की विशेष कृपा पाने का समय होता है। नवरात्र में प्रथम दिन के अनुसार माता के आगमन और प्रस्थान की सवारी का निर्धारण होता है। देवी पुराण में स्पष्ट लिखा गया है-शशि सूर्य गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे, गुरौ शुक्रे च दोलायां बुधे नौका प्रकीर्तिता। अर्थात रविवार को नवरात्र की शुरुआत होती है तो माता हाथी पर आती हैं। माता की हाथी की सवारी शांति, सुख और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसका मतलब यह देश और जनता के जीवन में शांति और समृद्धि लाएगी।
इसी तरह से नवरात्र में जिस दिन माता का प्रस्थान होता है उसके अनुसार उनका वाहन तय होता है। इसका भी ज्योतिष की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान होता है। देवी पुराण के अनुसार-शशि सूर्य दिने यदि सा विजया महिषागमने रुज शोककरा, शनि भौम दिने यदि सा विजया चरणायुध यानि करी विकला। रविवार को माता का प्रस्थान भैंसे पर होगा जो अधिक शुभ नहीं है। प्रतिपदा और कलश स्थापना मुहूर्त पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि शनिवार 29 मार्च को शाम 4:27 बजे से शुरू हो रही है, जो अगले दिन रविवार 30 मार्च रविवार को दोपहर 12:49 बजे तक रहेगी। ऐसे में चैत्र नवरात्रि 30 मार्च से शुरू हो रही है।
नवरात्र घट स्थापना 30 मार्च को की जाएगी।
● प्रातः कलश स्थापना मुहूर्त
30 मार्च को सुबह कलश स्थापना के लिए साढ़े 3 घंटे से अधिक का समय मिल रहा है। सुबह 6:13 बजे से 10:22 बजे के बीच घटस्थापना किया जा सकता है।
● दोपहर कलश स्थापना मुहूर्त
यदि सुबह के इस काल में किन्हीं कारणों से कलश स्थापना नहीं पाती है तो अभिजीत मुहूर्त में दोपहर में 12:01 बजे से 12:50 बजे के बीच कलश स्थापना की जा सकती है। इस समय घटस्थापना के लिए 50 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा। पहले दिन बनने वाले शुभ योगचैत्र नवरात्रि के पहले दिन इंद्र योग बन रहा है, जो शाम को 5:54 बजे तक है। साथ ही 30 मार्च को सर्वार्थ सिद्धि योग शाम को 4:35 बजे से अगले दिन सुबह 6:12 बजे तक है।


