मुंबई वार्ता/सतीश सोनी

बिना किसी पूर्व सूचना या सूचना के रेस्टोरेंट में हर्बल हुक्का परोसने के लिए मुंबई पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के खिलाफ १२ रेस्टोरेंट मालिकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने पुलिस कार्रवाई से सुरक्षा की भी मांग की है।


याचिकाकर्ता हाईकोर्ट के २२ अगस्त, २०१९ के आदेश का पूरी तरह से पालन करते हुए केवल तंबाकू मुक्त हर्बल हुक्का परोसने वाले रेस्टोरेंट चला रहे हैं। रेस्टोरेंट मालिकों ने अपनी याचिका में यह भी दावा किया है कि उन्हें यह सेवा प्रदान करने की अनुमति है। २०१९ के हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद, पुलिस गृह विभाग के आदेश पर रेस्टोरेंट पर छापे मार रही है, रेस्टोरेंट मालिकों को धमका रही है और रेस्टोरेंट से हर्बल हुक्का परोसना बंद करने को कह रही है।


याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस की यह कार्रवाई उच्च न्यायालय के पूर्व आदेशों का उल्लंघन है। यह कार्रवाई उनके रेस्टोरेंट को पूर्व सूचना दिए बिना की जा रही है। याचिकाकर्ताओं ने यह भी दावा किया है कि उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है और इससे उनके कर्मचारियों के वेतन पर असर पड़ रहा है।
राज्य के गृह विभाग ने ६ जून को एक परिपत्र जारी किया था। इसमें अवैध हुक्का पार्लरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दिए गए थे। साथ ही चेतावनी भी दी गई थी कि ऐसी गतिविधियों की अनुमति देने वाली पुलिस को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
याचिकाकर्ताओ का कहना है कि वे तंबाकू आधारित हुक्का नहीं परोसते हैं और सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम के सभी प्रावधानों का पालन करते हैं। इसलिए, याचिकाकर्ताओं ने याचिका के माध्यम से मांग की है कि पुलिस कार्रवाई से सुरक्षा की मांग करते समय यह परिपत्र हम पर लागू न हो।
रेस्टोरेंट मालिकों की याचिका पर हाल ही में न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति मंजूषा देशपांडे की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। उस समय, अदालत ने सरकारी वकीलों को निर्देश लेने के लिए समय दिया और याचिकाकर्ताओं को अतिरिक्त विवरण के साथ एक संशोधित आवेदन दायर करने की अनुमति दी।



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