अंधेरी सबवे में जलभराव रोकने के लिए बीएमसी की नई योजना, फ्लाईओवर की जगह बनाए जाएंगे जल-संग्रहण तालाब।

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मुंबई वार्ता संवाददाता

हर साल मानसून के दौरान अंधेरी सबवे में होने वाले जलभराव की समस्या से निपटने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने फ्लाईओवर निर्माण की योजना फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दी है। अब बीएमसी इस समस्या के स्थायी समाधान के रूप में जल-संग्रहण (वॉटर होल्डिंग) तालाब बनाने की संभावना तलाश रही है।


बीएमसी ने इस परियोजना के लिए तीन संभावित स्थान प्रस्तावित किए हैं। इनमें अंधेरी स्थित डॉ. आंबेडकर गार्डन में 1,300 वर्गमीटर का भूखंड, जोगेश्वरी में 1,000 वर्गमीटर का प्लॉट तथा वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे के पास 2,000 वर्गमीटर का भूखंड शामिल है। इस प्रस्ताव पर हाल ही में अंधेरी के विधायक और भाजपा मुंबई अध्यक्ष Ameet Satam के साथ समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई।

■ फ्लाईओवर योजना क्यों हुई रद्द?


बीएमसी ने पहले अंधेरी सबवे पर फ्लाईओवर बनाने की योजना बनाई थी, लेकिन स्थान की कमी के कारण इसे अव्यावहारिक माना गया। चूंकि सबवे के ऊपर पश्चिम रेलवे की लाइन गुजरती है, इसलिए फ्लाईओवर को छह मीटर से अधिक ऊंचाई पर बनाना पड़ता। इसके लिए आवश्यक ढलान (ग्रेडिएंट) उपलब्ध नहीं होने के कारण योजना को छोड़ दिया गया।

■ अन्य विकल्पों पर भी विचार


बीएमसी जलभराव रोकने के लिए सम्प पिट (Sump Pit) और भूमिगत जल-संग्रहण टैंकों जैसे विकल्पों पर भी विचार कर रही है। इसी तरह की व्यवस्था मुंबई के हिंदमाता और गांधी मार्केट क्षेत्रों में लागू की गई थी, जहां इससे मानसून के दौरान जलभराव में काफी कमी आई है।

■ क्यों महत्वपूर्ण है अंधेरी सबवे?


अंधेरी सबवे मुंबई के प्रमुख पूर्व-पश्चिम संपर्क मार्गों में से एक है। मानसून में जलभराव के कारण जब इसे बंद करना पड़ता है, तो वाहनों को गोखले ब्रिज के रास्ते लगभग 1.5 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। वहीं, Balasaheb Thackeray Flyover के जरिए यात्रा करने पर करीब 3 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है।
यह सबवे मोगरा नाले से जुड़े निचले कैचमेंट क्षेत्र में स्थित होने के कारण हर वर्ष भारी बारिश में जलभराव की चपेट में आ जाता है।

■ बीएमसी आयुक्त का बयान


अश्विनी भिड़े ने कहा, “इस स्थान पर जलभराव कम करने के लिए अब कई तकनीकी समाधान उपलब्ध हैं और हम सभी विकल्पों का अध्ययन कर रहे हैं। हालांकि, जब तक ये उपाय लागू नहीं हो जाते, मानसून के दौरान सबवे में जलभराव होने पर उसे बंद करना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। अंधेरी सबवे के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हैं।”

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